Published On : Wed, Jan 9th, 2019

मनपा:बाहरी अधिकारी ‘मेट्रो’ तो स्थानीय अधिकारी ‘लोकल’

– इसलिए मनपा के महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का हो रहा निजीकरण

नागपुर:नागपुर महानगरपालिका में दो दशक पूर्व अधिकारी-कर्मी जज्बाती हुआ करते थे. किसी भी व्यक्तिगत या सार्वजानिक कार्यों को तुरंत तरजीह देते थे. अब समय बदल गया है. मनपा के लोकल अधिकारी-कर्मी आज-अभी के बजाय कल पर ज्यादा भरोसा करने लगे हैं. वहीं दूसरी ओर मनपा में तैनात बाहरी (आउटसोर्सिंग) अधिकारी विषय की गंभीरता व समय को तवज्जों देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में लगे दिखे जा सकते हैं.

मनपा के लोकल अधिकारी-कर्मी अपनी जिम्मेदारियों के साथ न्याय करने के बजाय आए-दिन बकाया,समय पर वेतन,वक़्त पर पदोन्नति सह सुविधा के लिए अक्सर सक्रिय देखा जा सकते हैं. तय जिम्मेदारियों को पल-पल निपटाने के बजाय अधिकांश अन्य कामों में ज्यादा लीन रहते देखें गए हैं.


कई बार प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर गंभीर रहें, आगे की कारवाई के लिए भेजे गए विभाग में किस कारण काम अटका पड़ा है उसकी मालूमात रख समस्या सुलझाएं, लेकिन आम तौर पर ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है.

लोकल अधिकारी-कर्मी के पास प्रस्ताव या फाइल गई तो उसे तुरंत देखने के बजाय,सामने वालों को कल-परसों आने का निर्देश दिया जाता है. वहीं दूसरी ओर मनपा के बाहरी अधिकारी वर्ग समक्षता से आए हुए मामलों की गंभीरता को देख तुरंत गंभीर दखल लेते देखे गए हैं. जिससे उनके पास आए आगंतुक संतुष्ट होकर लौटते देखे जाते हैं.

इसलिए शायद मनपा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बाहरी अधिकारियों के कांधों पर डालने मजबूर होते दिखाई दे रही है. जिसे वे भली-भांति निभा रहे हैं. लोकल अधिकारी प्रस्तावित प्रकल्प के निर्माण क्षेत्र/कार्य क्षेत्रों में उपजी समस्याओं का मुआयना करने या वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आक्षेप लेने पर उसका जवाब देने हेतु उपस्थित रहने के बजाय प्रस्ताव वापिस बुलाने और उसमें काला-पीला करने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं. दूसरी ओर बाहरी अधिकारी काम को जब का तब सुलझाकर आगंतुकों को राहत देने में अग्रसर रहते हैं.

उल्लेखनीय यह हैं कि मनपा में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों का निजीकरण का मुख्य कारण यह भी बतलाया जा रहा है कि लोकल अधिकारियों-कर्मियों ने विभाग का बंटाधार किया इसलिए निजीकरण की नौबत आई है. ऊपर से बंटाधार करने वाले अधिकारियों को मनपा से जुडी कंपनियों में विशेषज्ञ के रूप में तैनात कर युवा बेरोजगारों पर मनपा प्रशासन कहर ढा रही है. उक्त घटनाक्रम के कारण आजकल मनपा में लोकल व मेट्रो को कोडवर्ड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा.