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    Published On : Mon, Oct 8th, 2018

    छुट्टी पर चल रहे अधिकारी जीपीएस घड़ियों से छुड़ा रहे पीछा

    नागपुर: मनपा के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सफाई कर्मचारियों के नदारद रहने को लेकर पार्षदों की ओर से कई बार मनपा की सभा में आपत्ति जताए जाने के बाद सफाई कर्मचारियों को जीपीएस घड़ी देकर उनकी कार्यप्रणाली में तो सुधार किया गया, लेकिन इसी तरह मनपा के अन्य कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखने केलिए इसका पालन करने को लेकर आवाज उठने लगी थी.

    इसी बीच अनुशासन को लेकर गंभीर नए मनपा आयुक्त वीरेन्द्र सिंह के पदभार संभालने के कुछ ही दिनों में विभाग प्रमुखों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखने के लिए अधिकारियों को जीपीएस घड़ी का वितरण भले ही किया गया हो, लेकिन अब लगभग एक माह से उनके छुट्टी परचले जाने से अधिकारियों की जीपीएस घड़ियां ही बंद हो गई हैं. यहां तक कि कई अधिकारियों द्वारा घड़ियों को अलमारी में बंद कर दिए जाने की जानकारी भी सूत्रों ने दी. विशेषत: 5,000 रु. कीमत की घड़ी के साथ ही 200 रु. सिम पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ अधिकारियों की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है.

    सूत्रों के अनुसार मनपा आयुक्त द्वारा पदभार स्वीकार करने के बाद विशेष रूप से कार्यालयीन समय पर गंभीरता बरतने की हिदायत अधिकारियों को दी गई थी. कार्यालयमें आने और जाने के समय का कड़ाई से पालन करने के कड़े निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद सभी अधिकारियों पर उनके विभागों में जाकर नजर रखना संभव नहीं होनेसे इस तरह का नया उपक्रम शुरू किया गया है.

    बताया जाता है कि अधिकारियों को इस घड़ी को पहनना अनिवार्य किया गया है, जिससे सुबह 10 से लेकर शाम 6 बजेतक उनकी कार्यप्रणाली पर नजर रखना संभव हो सकेगा. मनपा आयुक्त की अनुशासनात्मक पहल में जीपीएस घड़ी देने से कई अधिकारियों के चेहरे पीले पड़ गए थे. जानकारों के अनुसार अधिकारी अधिकांश समय साइट पर होने का कारण देकर विभागों से बाहर रहने के आदी थे. लेकिन मजबूरन घड़ी पहननी पड़ रही थी.

    उल्लेखनीय है कि सफाई कर्मचारियों को घड़ी देने का प्रकल्प सफल होने के बाद इसी आधार पर मनपा कर्मचारियों को भी घड़ी देने की मांग कई पार्षदों ने मनपा की सभामें की थी. जीपीएस घड़ी से कम्प्यूटर पर मनपा आयुक्त द्वारा विभाग प्रमुखों को ट्रैक करने की व्यवस्था थी. इम्पेरियल कम्पनी की इस घड़ी पर मनपा का लोगो भी चस्पाकिया गया था. कम्पनी की ओर से 5,000 रु. प्रति घड़ी की कीमत के आधार पर मनपा को उपलब्ध कराया गया, जबकि घड़ी में सिम के लिए 200 रु. प्रतिमाह कम्पनी कोभुगतान की व्यवस्था भी की गई. सहायक आयुक्त से लेकर विभाग प्रमुखों को यह घड़ी पहनना अनिवार्य किया गया. कुछ अधिकारियों ने दबे स्वर में इसका विरोध करतेहुए यह एक तरह से अविश्वास होने की आपत्ति जताई थी.

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