Published On : Tue, May 9th, 2017

कोराडी रोड के शिवकृष्णधाम नगर पर चला बुलडोज़र


नागपुर:
 कोराडी रोड स्थित शिवकृष्णधाम नगर में मंगलवार को करीब 150 मकान तोड़े गए. नागपुर शहर में अतिक्रमण निर्मूलन की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. इस दौरान करीब 400 पुलिस कर्मियों को परिसर में तैनात किया गया था. मकानों को तोड़ने के लिए 10 जेसीबी मशीनों का सहारा लिया गया था. इस झोपड़पट्टी की आबादी करीब 1500 बताई जा रही है. सुबह से ही इस बस्ती की ओर जानेवाले रास्तों पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए थे. साथ ही कोराडी पर भी बस्ती की ओर जानेवाले मार्ग पर भारी संख्या में पुलिस बंदोबस्त लगा रहा. नागरिकों के विरोध की आशंका के मद्देनजर बड़ी तादाद में पुलिस बंदोबस्त लगाया गया था. इस कार्रवाई को करने के लिए प्रशासन की ओर से पूरी प्लानिंग बनाई गई थी। जिसमें दंगा विरोधी दल, वॉटर केनॉन वाहन, बड़ी संख्या में एनआईटी के टिप्पर, ट्रक आदि लगाए गए थे.

कार्रवाई के डर से सुबह से ही लोग अपने घरों में सामने खड़े थे. एनआईटी और पुलिस अधिकारियों के दल बल के साथ परिसर में पहुंचने पर नागरिकों का विरोध ज्यादा देर नहीं टिक सका। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिवकृष्णधाम नगर की यह जगह तवक्कल लेआऊट है। जगह खाली होने की वजह से इस पर भूमाफिया दिलीप ग्वालबंशी ने और हरीश ग्वालबंशी ने लोगों से 20 से 25 हजार रुपए लेकर उन्हें जगह बेची थी. तवक्कल की ओर से कोर्ट में केस दायर किया गया था. जिसके बाद इस बस्ती को हटाने के निर्देश कोर्ट ने दिए थे.

इस दौरान परिसर में भाजपा के नगरसेवक जगदीश ग्वालबंशी और कामगार मंडल के अध्यक्ष मुन्ना यादव भी नागरिकों की खैर खबर लेने पहुंचे. ग्वालबंशी ने बस्ती तोड़ने की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि यह कार्रवाई लोकतंत्र की हत्या है. लोगों को बिना नोटिस दिए उनका घर उजाड़ना गलत है. तो वही मुन्ना यादव ने भी विरोध जताते हुए कहा कि प्रशासन को इन गरीबों के घर तोड़ने से पहले इनके लिए पहले पर्यायी व्यवस्था उपलब्ध कराना चाहिए था. हालांकि यह दोनों ही नगरसेवक भाजपा में ही है और सरकार भी भाजपा की ही है. नागरिक अपने घर टूटने के कारण काफी बेबस नजर आए. कुछ महिलाएं अपने घरों को टूटते हुए देखने पर रोने भी लगी थीं. कार्रवाई के दौरान घर के बड़े बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चे महिलाएं सभी सामान समेटने में लगे रहे.

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पिछले पांच वर्षो से यहां पर रह रहे अजय पारधी ने बताया कि उन्हें कोई भी नोटिस प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया और अचानक यह कार्रवाई बस्तीवालों पर की जा रही है. राजेश कुमार यादव ने बताया कि पिछले पंद्रह वर्षो से वे यहां पर रह रहे हैं. बड़ी मुश्किल से उन्होंने किसी को पैसे देकर इस जगह पर वे बसे थे. लेकिन अब घर टूटने की वजह से वे बेघर हो गए हैं।

बबलू विश्वकर्मा पिछले दस वर्षो से यहां अपने परिवार के साथ रह रहे हैं. लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई के कारण वे सड़क पर आ गए है. किशोर व्यास ने भी रोते हुए बताया कि घर टूटने से कुछ दिन पहले अगर उन्हें जानकारी दी गई होती तो वे कही दूसरी जगह सर छिपाने का प्रबंध कर लेते, लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई के कारण उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है.प्रेम प्रकाश गिरी और सुषमा यादव भी अपने आंसू रोक नहीं पाए और अपना सामन घर से बाहर निकालने लगे.


एनआईटी के अधीक्षक अभियंता सतीश पासेबंद भी कार्रवाई के दौरान मौजूद थे. उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद बस्ती को खाली कराया जा रहा है. और 150 मकान गिराने के निर्देश दिए गए है. हालांकि ज्यादा जानकारी देने से वे बचते रहे.


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