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    Published On : Tue, Oct 6th, 2020

    अवैध रेती उत्खनन का नया हथकंडा,जिला प्रशासन ने दी मिट्टी मिश्रित रेत उत्खनन की अनुमति

    – और 4 से 5 घाटों के आसपास नदी किनारे खेत में जमा रेत निकासी सह बिक्री व परिवहन की अनुमति मिलने की संभावना

    नागपुर -निजी और सरकारी निर्माणकार्यो की रक्तवाहिनी अर्थात रेती और रेती का नियमानुसार उत्खनन न किये जाने से जलसंपदा और पर्यावरण को बड़ा नुकसान हुआ।वर्षो से सख्त हिदायत के बाद केंद्र सरकार की संबंधित विभाग ने रेती उत्खनन की अनुमति नहीं दी तो रेती के अवैध उत्खनन करने वालों ने नया हथकंडा अपना रहे,जिसे जिला प्रशासन सरकारी मुहर लगाकर केंद्र सरकार के संबंधित विभाग और न्यायालय के सख्त निर्देशों का उल्लंघन कर रहा। ऐसा ही कुछ कल घटित हुआ,जिला प्रशासन ने कोछि घाट के समीप नदी किनारे के खेतों में जमा रेत मिश्रित मिट्टी निकालने की अनुमति दी,जल्द ही 4 से 5 अन्य ऐसे अनुमति जिला प्रशासन दे सकती हैं।

    कोरोना का प्रभाव हल्का होता देख बंद या नए निर्माणकार्य पुनः शुरू होने लगे। इन सभी निजी क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र के निर्माणकार्यो में रेती का महत्व काफी हैं लेकिन दूसरी ओर रेती का उत्खनन अधिकृत तौर पर बंद हैं। ऐसे में शिवाय नए नए हथकंडे अपनाने या फिर अवैध रेती उत्खनन ही अंतिम पर्याय हैं। इसलिए नदी किनारे खेतों में जमा मिट्टी मिश्रित रेती निकालने की अनुमति मांगी जा रही,इस क्रम में कल सोमवार की शाम जिला प्रशासन ने कोछि घाट के समीप मिट्टी मिश्रित रेती निकालने की अनुमति प्रदान कर अवैध रेती उत्खनन करने वालों को नया जीवनदान दिया।जबकि इस घाट के समीप डैम निर्माण में अधिकांश खेती को सरकार ने अधिग्रहण कर लिया था।

    जानकारी मिली हैं कि मलाईदार रेती घाट के समीप के खेती मालिकों से रेती के व्यवसायी आर्थिक समझौता कर एक अग्रीमेंट ऐसा तैयार करते कि उनकी खेती में रेती हैं जो खेत और फसल को नुकसान कर रहा,जिसको निकालने की अनुमति प्रदान की जाए। क्योंकि प्रशासन से भी समझौता हो गया होता हैं इसलिए आज तो कोछि में अनुमति मिली,जल्द ही भविष्य में आधा दर्जन से अधिक आवेदकों को अनुमति दे दी जाएंगी।

    इसके बाद रेती के व्यवसाय में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लिप्त अनुमति प्राप्त जगह की आड़ में नदी से रेती का उत्खनन कर सरकारी,गैर सरकारी और निजी माँगकर्ताओ को रेती की आपूर्ति करेंगे। सवाल यह हैं कि निजी क्षेत्र में अवैध रेती खप भी जाएंगी,क्योंकि मांग ज्यादा नहीं होती लेकिन सरकारी,अर्ध सरकारी निर्माणकार्यो में उक्त आपूर्तिकर्ता के रेती को वैध करार दिया जाएगा या फिर अवैध ?

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