Published On : Wed, Mar 6th, 2019

लापरवाही की हद : तकनिकी खराबी के कारण आरटीई के आवेदन में दूसरे दिन भी आ रही परेशानियां

नागपूर: आरटीई ऑनलाइन की शुरुवात 5 मार्च यानी कल से हुई थी . पहले ही दिन आरटीई आवेदन भरने में पालकों को काफी परेशानियां हुई. वेबसाइट शाम को खुलने की वजह से भी पालक परेशांन हुए. आरटीई की महाराष्ट्र की वेबसाइट में ऑनलाइन आवेदन का फॉर्म तो था. लेकिन जिले शहर का नाम नहीं होने की वजह से नागपुर शहर के पालक फॉर्म नहीं भर पा रहे थे. फॉर्म में जिले के बॉक्स में केवल नाशिक शहर का ही नाम आ रहा है. दूसरे दिन भी काफी समस्याएं हो रही है. दूसरे दिन वेबसाइट में गूगल मैपिंग भी नहीं हो पा रहा है. प्रशासन की लापरवाही के कारण सिस्टम में गड़बड़ी हुई है. इस पुरे मामले में आरटीई एक्शन कमेटी के चेयरमैन मो. शाहिद शरीफ ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी 6 सालों से आरटीई का इतना बड़ा काम एक ही व्यक्ति संभाल रहा है. साढ़े 6 हजार बच्चों का डेटा, स्कूलों की डिटेल्स, समस्याएं, एडमिशन होना नहीं होना, यह सभी काम एक ही अधिकारी पर थोपा गया है. आरटीई से जुडी हर जानकारी और समस्या के लिए जिला परिषद् के प्राथमिक शिक्षणाधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है. लेकिन शिक्षणाधिकारी खुद गंभीर नहीं है. पहले हर साल आरटीई एडमिशन के समय आरटीई एक्शन कमेटी, शिक्षा विभाग और महानगरपालिका समन्यवय करके यह प्रोग्राम चलाते थे. सेंटर की जानकारी, टेक्निकल जानकारी, स्कूलों के एडमिशन की जानकारी होती थी, पालकों को होनेवाली परेशानी और टेक्निकल सपोर्ट का समाधान किया जाता था. लेकिन इस साल कोई भी काम नहीं हुआ. इस बार किसी भी तरह का सेंटर नहीं बना, शरीफ ने बताया कि शिक्षणाधिकारी से इस बारे में बातचीत हुई तो उन्होंने साफ़ कहा की मेरे पास आरटीई स्टाफ नहीं है. प्रशासन और सरकार आरटीई को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने बताया की फॉर्म भरते समय रजिस्ट्रेशन हो रहा है, आईडी जनरेट हो रहा है. लेकिन गूगल मैपिंग नहीं हो रही है.

आरटीई को लेकर राज्य सरकार या फिर शहर का शिक्षा विभाग हमेशा से ही लापरवाही करता रहा है. नागपुर के शिक्षा विभाग की ओर से आरटीई को लेकर हमेशा से ही उनका उदासीन रव्वैया रहा है. शिक्षणाधिकारी की ओर से आरटीई की बैठक ली जानी थी. लेकिन वह भी उनकी ओर से नहीं ली गई थी और अब जब तकनिकी समस्या के कारण नागपूर के पालक अपने बच्चों के ऑनलाइन आवेदन नहीं भर पा रहे है. नागपूर शहर के शिक्षा विभाग के अधिकारियो की लापरवाही के कारण इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ सकता है.

इस बारे में जिला परिषद् के शिक्षणाधिकारी वंजारी से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई. उन्हें मोबाइल से संदेश भी भेजा गया. लेकिन उनकी ओर से किसी भी तरह का कोई प्रतिसाद नहीं दिया गया.