नागपुर में 6 स्थानों के CCTV फुटेज का हो रहा विश्लेषण, देश के 12-13 शहरों में लागू हुआ सिस्टम; निर्माण धूल, कचरा जलाना और औद्योगिक धुआं भी प्रदूषण के बड़े कारण
नागपुर, 31 अक्टूबर। शहरों में वायु प्रदूषण पर नजर रखने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का आकलन करने के लिए CSIR-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI), नागपुर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक नया डैशबोर्ड विकसित किया है। इस तकनीक की मदद से CCTV कैमरों के जरिए सड़कों पर गुजरने वाले वाहनों की पहचान और उनकी गिनती की जाएगी। साथ ही, उनसे होने वाले प्रदूषण का अनुमान भी लगाया जा सकेगा।
क्या है AI-LSEI डैशबोर्ड?
AI-Integrated Line Source Emission Inventory (AI-LSEI) नाम का यह सिस्टम CCTV फुटेज का विश्लेषण कर अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों की आवाजाही रिकॉर्ड करता है। इसके आधार पर हर घंटे होने वाले वाहन उत्सर्जन का आकलन किया जाता है।
यह डैशबोर्ड वैज्ञानिक रूप से निर्धारित एमिशन फैक्टर्स के आधार पर पार्टिकुलेट मैटर (PM), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन (HC) जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन की गणना करता है।
इसका डेटा GIS आधारित मैप पर प्रदर्शित होता है, जिससे उन सड़कों और क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है जहां वाहनों से प्रदूषण का स्तर अधिक है।
NEERI के वैज्ञानिकों की टीम ने किया विकसित
इस तकनीक को NEERI के वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रभाग की टीम ने संस्थान के निदेशक एस. वेंकट मोहन के मार्गदर्शन में विकसित किया है। टीम में सीनियर साइंटिस्ट राहुल व्यावहारे, चीफ साइंटिस्ट केवी जॉर्ज, जय सिंह राजपूत, अथर्व मालोड़े, राज सोनारघरे और प्रणव वी. नायर शामिल हैं।
देश के 12-13 शहरों में हो रहा इस्तेमाल
NEERI के वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, AI-LSEI डैशबोर्ड को देश के करीब 12 से 13 शहरों में स्थापित किया गया है। इनमें दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े शहर शामिल हैं। विभिन्न शहरों के CCTV फुटेज के जरिए ट्रैफिक मूवमेंट और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का विश्लेषण किया जा रहा है।
नागपुर में 6 स्थानों पर ट्रायल
नागपुर में इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए NEERI ने नागपुर महानगरपालिका (NMC) से संपर्क किया है। फिलहाल शहर के 6 अलग-अलग स्थानों के CCTV फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है।
संस्थान की योजना महाराष्ट्र सरकार से संपर्क कर शहर के अधिक से अधिक CCTV कैमरों के फुटेज तक पहुंच प्राप्त करने की है। इससे रियल टाइम में वाहन प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही वैज्ञानिकों की टीम नागपुर के प्रदूषण हॉटस्पॉट की शुरुआती सूची तैयार कर रही है।
नागपुर में वाहनों से ज्यादा दूसरे स्रोत चिंता का विषय
NEERI के वैज्ञानिकों के मुताबिक, नागपुर में वायु प्रदूषण के लिए वाहन उत्सर्जन ही सबसे बड़ा कारण नहीं है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, खुले में कचरा जलाना और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि शहर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन को इन सभी स्रोतों पर एक साथ ध्यान देना होगा।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
AI-LSEI दिनभर सड़कों पर वाहनों की संख्या और आवाजाही में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड करता है। इसके बाद वाहन श्रेणी, ईंधन और इंजन तकनीक से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर उत्सर्जन का अनुमान लगाया जाता है।
इसके लिए परिवहन पोर्टल पर उपलब्ध वाहन संबंधी आंकड़ों और वैज्ञानिक एमिशन फैक्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है।
उदाहरण के तौर पर सुबह के व्यस्त समय में जब सड़कों पर दोपहिया और कारों की संख्या बढ़ती है, तब सिस्टम इस बदलाव को रिकॉर्ड कर संबंधित उत्सर्जन का आकलन करता है।
इस तरह प्रशासन को यह समझने में मदद मिल सकती है कि दिन के किस समय और किन सड़क मार्गों पर वाहन प्रदूषण अधिक है।



