नागपुर: जामिया, एएमयू और जेएनयू में बीते दिनों हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गरमाई सियासत के बीच देश के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे CJI SA Bobde ने कहा है कि विश्वविद्यालयों को असेंबली लाइन प्रॉडक्शन यूनिट की तरह काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय का विचार यह दर्शाता है कि हम एक समाज के रूप में क्या हासिल करना चाहते हैं।
मुख्य न्यायाधीश बोबडे CJI SA Bobde ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि विश्वविद्यालय महज ईंट और गारे से बने ढांचे नहीं हैं। निश्चित तौर पर इन्हें असेंबली लाइन प्रॉडक्शन यूनिट (एक ही तरह का उत्पाद बनाने वाली ईकाई) की तरह काम नहीं करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि एक विश्वविद्यालय का विचार ऐसा होता है कि हम एक समाज के रूप में क्या हासिल करना चाहते हैं…?
दरअसल, मुख्य न्यायाधीश बोबडे संवेदनशील मसलों पर अपनी बात तार्किक तरीके से रखते हैं। बीते दिनों उन्होंने वकील विनीत डांडा (Lawyer Vineet Dhanda) की याचिका पर फैसला देते हुए कहा था कि देश अभी मुश्किल हालात से गुजर रहा है जब यहां शांति लाने की कोशिशें की जानी चाहिए और ऐसी याचिकाएं शांति लाने में मददगार नहीं होंगी। याचिका में CAA को लेकर शांति और सौहार्द्र में व्यवधान डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी।
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