नागपुर: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विद्यापीठ की कार्यप्रणाली पर फिर एक बार प्रश्नचिन्ह लग गया है। इस बार विद्यापीठ प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं अनुसूचित जाति, जनजाति संवर्ग के विद्यार्थी। विद्यापीठ प्रशासन द्वारा फीस ढांचे की जानकारी अपडेट नहीं किए जाने से स्नातकीय एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के 95 हजार से ज्यादा दलित विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप दो साल से अटकी पड़ी है। यदि समय रहते इन विद्यार्थियों को छात्रवृति नहीं मिली तो इन 95 हजार से ज्यादा युवाओं की आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
विद्यापीठ प्रशासन को हर वर्ष फ़ी स्ट्रक्चर अपडेट करना होता है। जिसमें विद्यार्थियों की फीस के बारे में पूरी जानकारी दी गयी रहती है। यह जानकारी समाजकल्याण विभाग तक पहुँचती है। लेकिन पिछले 2 वर्षो से नागपुर विद्यापीठ की ओर से जानकारी अपडेट नहीं की गयी। जिसके कारण स्नातक एवं स्नातोकत्तर विद्यार्थियों को दूसरा वर्ष समाप्त होने पर भी पहले वर्ष की स्कॉलरशिप नहीं मिली है। इस कारण विद्यार्थी परेशानी में है। नागपुर विद्यापीठ के साथ साथ इस सुस्त रवैये में विद्यापीठ से संलग्न महाविद्यालय भी शामिल हैं।
क्या कहते है समाज कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त?
इस बारे में समाज कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त वी.एम.वाकुलकर ने बताया कि स्कॉलरशिप के 16 करोड़ रुपए 2016 -2017 में वितरित हुए हैं। 2016 -17 में स्कॉलरशिप के 1 लाख 30 हजार आवेदन विभाग को प्राप्त हुए थे। जिनमें से 23 हजार विद्यार्थियों को ही छात्रवृति दी गयी क्योंकि इतने ही विद्यार्थियों के फीस ढांचे की जानकारी अपडेट की गयी थी। सहायक आयुक्त ने कहा कि नागपुर विद्यापीठ से संलग्न महाविद्यालय इस वर्ष 28 फरवरी तक फीस ढांचे की अद्यतन जानकारी के साथ स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। उसके बाद आवेदन पर विचार नहीं होगा।
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