
लोकमत भवन से लेकर कांचीपुरा चौक तक का पूरा इलाका अब व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। कभी शांत आवासीय क्षेत्र रहा रामदासपेठ आज अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, होटलों, मीडिया संस्थानों, कार्यालयों, रेस्टोरेंट्स, कैफे और बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों से भरा पड़ा है। रोजाना हजारों लोग यहां आते-जाते हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत चिंताजनक है।
कई इमारतों में फायर एग्जिट या तो मौजूद नहीं हैं, या फिर उनका उपयोग स्टोर रूम की तरह किया जा रहा है। कहीं सीढ़ियों में कबाड़ भरा हुआ है तो कहीं आपातकालीन निकास मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हैं। जिन बेसमेंट और पार्किंग क्षेत्रों को वाहनों के लिए आरक्षित होना चाहिए था, वहां दुकानें, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती दिखाई देती हैं।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब कई इमारतों की छतों पर रेस्टोरेंट और कैफे संचालित होते दिखाई देते हैं। इनमें उपयोग होने वाली सजावटी सामग्री और इंटीरियर का बड़ा हिस्सा अत्यधिक ज्वलनशील हो सकता है, जो आग लगने की स्थिति में खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
फायर एनओसी पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के बीच यह चर्चा आम है कि कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास वैध और अद्यतन फायर एनओसी तक नहीं हो सकती। यदि ऐसा है, तो सवाल उठता है कि संबंधित विभागों द्वारा नियमित जांच और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
कब हुई थी आखिरी मॉक ड्रिल?
एक और महत्वपूर्ण प्रश्न है-रामदासपेठ के इस अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र में आखिरी बार फायर मॉक ड्रिल कब आयोजित की गई थी?
जहां रोजाना हजारों मरीज, होटल अतिथि, कर्मचारी और नागरिक मौजूद रहते हैं, वहां आपदा प्रबंधन की तैयारी कितनी है, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।
अस्पताल, होटल और ऊंची इमारतें—खतरनाक मिश्रण
रामदासपेठ सिर्फ एक व्यावसायिक क्षेत्र नहीं है। यह नागपुर का प्रमुख हेल्थकेयर हब भी है। यहां शहर के कई बड़े अस्पताल और नर्सिंग होम स्थित हैं। साथ ही बड़े होटल, मीडिया हाउस और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी इसी इलाके में हैं।
यदि किसी एक इमारत में बड़ी आग लगती है, तो घनी आबादी और सटे हुए निर्माणों के कारण आग तेजी से आसपास की इमारतों तक फैल सकती है। कई होटलों और व्यावसायिक इमारतों का निर्माण इतनी कम दूरी पर हुआ है कि आपातकालीन स्थिति में राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?
निस्संदेह, हाल की दोनों घटनाओं में नागपुर फायर ब्रिगेड की तत्परता और साहस सराहनीय रही। लेकिन हर बार दमकलकर्मियों की बहादुरी पर निर्भर रहना समाधान नहीं हो सकता।
जरूरत इस बात की है कि नागपुर महानगरपालिका और अग्निशमन विभाग लोकमत भवन से कांचीपुरा चौक तक के पूरे रामदासपेठ क्षेत्र का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराए। इसमें फायर एनओसी, फायर फाइटिंग सिस्टम, आपातकालीन निकास, पार्किंग के दुरुपयोग, छतों पर चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और भवन सुरक्षा मानकों की गहन जांच होनी चाहिए।
ऐशिक्स एनएक्स और युगधर्म कॉम्प्लेक्स की आग की घटनाएं केवल चेतावनी हो सकती हैं। अगली घटना कहीं एक ऐसी त्रासदी में न बदल जाए, जिसकी कीमत जान-माल के भारी नुकसान से चुकानी पड़े। अब कार्रवाई का समय है, हादसे के बाद शोक व्यक्त करने का नहीं।
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