नागपुर टुडे – देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नागरिकों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पुलिस के वीर जवानों को बुधवार को नागपुर में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नागपुर शहर पुलिस आयुक्तालय तथा नागपुर के अन्य पुलिस विभागों के संयुक्त तत्वावधान में पुलिस मुख्यालय स्थित शहीद स्मारक पर पुलिस हुतात्मा दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल किलोर सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों, पुलिस कर्मचारियों और नागरिकों ने शहीदों को नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान देशभर में कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 153 पुलिस अधिकारियों और जवानों के नामों का वाचन किया गया। पुलिस बल के जवानों ने शोक सलामी देकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। पूरा परिसर शहीदों के सम्मान और राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान की भावना से ओतप्रोत नजर आया।
पुलिस स्मृति दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन सभी वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने देशवासियों की सुरक्षा के लिए अपने आज को देश के कल के नाम कर दिया।
हॉट स्प्रिंग्स की वह घटना, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास वर्ष 1959 की उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जब लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में भारतीय पुलिस के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के अत्यंत दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उपनिरीक्षक करम सिंह के नेतृत्व में 10 जवानों की एक टुकड़ी सीमा क्षेत्र में गश्त कर रही थी। यह इलाका अत्यधिक ऊंचाई, कठिन पहाड़ी रास्तों और बेहद कम तापमान के कारण गश्त के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण था।
गश्त के दौरान भारतीय पुलिस दल को कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दल के प्रमुख ने जवानों को सुरक्षित स्थान पर मोर्चा संभालने का संकेत दिया। इसी दौरान चीनी सैनिकों की ओर से भारतीय पुलिस दल पर स्वचालित हथियारों से गोलीबारी शुरू कर दी गई।
भारतीय जवानों ने भी पूरी बहादुरी के साथ जवाब दिया। संख्या में अधिक विरोधी सैनिकों और सीमित हथियारों के बावजूद भारतीय जवानों ने पीछे हटने के बजाय मुकाबला जारी रखा। देश की सीमा और सम्मान की रक्षा करते हुए इस टुकड़ी के जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। शहीद जवानों का साहस भारतीय पुलिस बल के इतिहास में एक ऐसी मिसाल बन गया, जिसे आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
शहीदों की वीरता को देश ने किया सलाम
हॉट स्प्रिंग्स की घटना में शहीद हुए जवानों के नाम इतिहास में दर्ज हैं। इनमें धर्म सिंह, पूरण सिंह, नारबू लांबा, बेगराजमल, माखनलाल, ईमान सिंह, तेशरिंग बोखू, नारबू, हंगजीत सुब्बा और शिवनाथ प्रताप शामिल थे।
इन जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ा। उनकी वीरता ने देशभर के पुलिसकर्मियों को कर्तव्यनिष्ठा, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दी।
इस घटना के बाद शहीद जवानों के पार्थिव अवशेष भारत को सौंपे गए। 14 नवंबर 1959 को हॉट स्प्रिंग्स में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
इन वीर जवानों की स्मृति में हॉट स्प्रिंग्स में स्मारक बनाया गया। इस स्मारक पर अंकित संदेश आज भी हर देशवासी को बलिदान का अर्थ समझाता है।
स्मारक पर अंकित संदेश है:
“When you go home tell them of us for their tomorrow, we give up our today.”
अर्थात—जब आप अपने घर लौटें, तो लोगों को हमारे बारे में बताना। उनके बेहतर कल के लिए हमने अपना आज कुर्बान कर दिया।
यह संदेश केवल शहीद जवानों के बलिदान की याद नहीं दिलाता, बल्कि देश की सुरक्षा में जुटे प्रत्येक जवान के समर्पण को भी दर्शाता है।
इसी बलिदान की याद में 21 अक्टूबर को मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस
हॉट स्प्रिंग्स में शहीद हुए पुलिस जवानों की वीरता और बलिदान को सम्मान देने के लिए 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
इस दिन देशभर के पुलिस संगठनों में शहीद पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। पुलिस परेड मैदानों और शहीद स्मारकों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शहीदों के नामों का वाचन, शोक सलामी और दो मिनट का मौन रखकर उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया जाता है।
यह दिन पुलिस विभाग के लिए आत्ममंथन और संकल्प का भी अवसर है। पुलिसकर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना अपराधियों से मुकाबला करते हैं, कानून-व्यवस्था बनाए रखते हैं, आपदाओं में नागरिकों की मदद करते हैं और समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात डटे रहते हैं।
कई बार कर्तव्य निभाते हुए उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। ऐसे सभी वीर जवानों का बलिदान देश कभी नहीं भूल सकता।
नागपुर पुलिस मुख्यालय में शहीद स्मारक पर आयोजित हुआ मुख्य समारोह
नागपुर शहर पुलिस आयुक्तालय और शहर के अन्य पुलिस घटकों की ओर से बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे नागपुर शहर पुलिस मुख्यालय स्थित शहीद स्मारक पर पुलिस हुतात्मा दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल किलोर उपस्थित रहे। उनके साथ नागपुर शहर के पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील, सह पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, राज्य आरक्षित पुलिस बल के विशेष पुलिस महानिरीक्षक निसार तांबोली और नागपुर परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
कार्यक्रम में अपर पुलिस आयुक्त विनीता शाहू, वसंत परदेशी और राजेंद्र दाभाडे, नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार, महामार्ग पुलिस अधीक्षक लोहित मतानी, राज्य आरक्षित पुलिस बल गट क्रमांक-4 के समादेशक बच्चन सिंह, रेलवे पुलिस अधीक्षक मंगेश पोपट शिंदे, कारागृह पुलिस अधीक्षक वैभव आगे और बिनतारी संदेश विभाग के पुलिस अधीक्षक सुनील सावंत सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभाग लिया।
इसके अलावा नागपुर शहर के पुलिस उपायुक्त अन्नपूर्णा सिंह, रश्मिता राव, नित्यानंद झा, महेक स्वामी, आदित्य मिरखेलकर, रमेश धुमाल, डॉ. संदीप पखाले और राहुल माकणिकर सहित अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
नागपुर ग्रामीण के अपर पुलिस अधीक्षक अनिल मस्के, कारागृह विभाग की अपर पुलिस अधीक्षक दीपा आगे, सभी सहायक पुलिस आयुक्त, विभिन्न पुलिस थानों के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, पुलिस कर्मचारी और नागरिकों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
120 जवानों ने दी शोक सलामी, बैंड पथक ने भी निभाई भूमिका
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित मानवंदना परेड में नागपुर शहर पुलिस, नागपुर जिला ग्रामीण पुलिस, नागपुर रेलवे पुलिस और राज्य आरक्षित पुलिस बल गट क्रमांक-4 के एक-एक पथक ने हिस्सा लिया।
इन चारों पथकों में कुल 120 पुलिस जवानों ने भाग लेकर शहीदों को सलामी दी। इस दौरान पुलिस बैंड पथक ने भी अपनी भूमिका निभाई।
नागपुर शहर पुलिस मुख्यालय के रिजर्व पुलिस निरीक्षक विनोद तिवारी ने मानवंदना परेड का संचालन किया। कार्यक्रम का सूत्रसंचालन सहायक पुलिस आयुक्त नरेंद्र हिवरे ने किया।
सहायक पुलिस आयुक्त शिवप्रसाद पारवे और पुलिस निरीक्षक अरुण क्षीरसागर ने देशभर में कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए 153 पुलिस अधिकारियों और जवानों के नामों का वाचन किया।
इसके बाद उपस्थित अतिथियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र और पुष्प अर्पित कर वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
153 शहीदों का स्मरण, पुलिस बल के त्याग और समर्पण को नमन
इस वर्ष देशभर में कर्तव्य निभाते हुए 153 पुलिस अधिकारी और जवान शहीद हुए हैं। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर इन सभी वीरों को याद किया गया।
इन शहीदों की शहादत यह बताती है कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है। अपराध नियंत्रण, नागरिकों की सुरक्षा, संवेदनशील परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संकट के समय लोगों की सहायता करना पुलिस के दैनिक कर्तव्य का हिस्सा है।
इन जिम्मेदारियों को निभाते हुए कई पुलिसकर्मी अपने परिवारों से दूर रहते हैं और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। कुछ जवान ऐसे भी होते हैं, जो कर्तव्य निभाते हुए कभी घर वापस नहीं लौट पाते।
उनके परिवारों के लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती। ऐसे में शहीद पुलिसकर्मियों को याद करना और उनके परिवारों के प्रति सम्मान तथा संवेदना व्यक्त करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
नागपुर में आयोजित कार्यक्रम ने भी इसी भावना को सामने रखा। उपस्थित अधिकारियों और नागरिकों ने शहीद जवानों के बलिदान को याद करते हुए देश की सुरक्षा और नागरिकों की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
शहीदों का बलिदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा
पुलिस स्मृति दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा और समाज में शांति बनाए रखने के पीछे अनेक पुलिसकर्मियों का त्याग, संघर्ष और समर्पण जुड़ा है। हॉट स्प्रिंग्स में 1959 में शहीद हुए 10 जवानों से लेकर आज कर्तव्य निभाते हुए प्राण न्योछावर करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों तक, सभी का बलिदान देश के लिए अमूल्य है।
नागपुर पुलिस मुख्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह ने एक बार फिर इस संकल्प को दोहराया कि शहीद जवानों की वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
शहीदों को शत-शत नमन। उनकी वीरता अमर है, उनका बलिदान अमर है।







