
विदर्भ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (VPDA) के अनुसार, अब तक लगभग 30 पेट्रोल पंपों के बैंक खातों पर लियन लगाया गया है, जबकि दो खातों को पूरी तरह फ्रीज़ कर दिया गया है। ये सभी घटनाएं चोरी हुए डिजिटल पेमेंट माध्यमों से किए गए फ्रॉड से जुड़ी हैं, जिनमें पेट्रोल पंप मालिकों की कोई भूमिका नहीं रही है, फिर भी उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एसोसिएशन का कहना है कि लगभग 60% ग्राहक अब पेट्रोल और डीजल की खरीद डिजिटल माध्यमों से करते हैं, ऐसे में इस सेवा को बंद करना आम जनता के लिए भारी असुविधा का कारण बन सकता है।
फेडरेशन ऑफ ऑल महाराष्ट्र पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (FAMPEDA) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि अगर उनकी परेशानियों का समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूरी में डिजिटल भुगतान पूरी तरह बंद कर देंगे।
यह संकट पहले भी देखा गया था, जब ₹2000 के नोट वापस लेने के फैसले के बाद नकद लेन-देन में भारी इजाफा हुआ था, जिससे पेट्रोल पंप संचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा था।
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