
बताया गया कि यह बैठक लक्ष्मी यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुई थी, जिसमें सफाई, नाला सफाई, जलापूर्ति, टैक्स वसूली और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों की समीक्षा होनी थी। लेकिन कई नगरसेवकों का आरोप है कि बैठक में असली नियंत्रण मुन्ना यादव के हाथ में दिखाई दिया। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई और निर्देश दिए, जबकि वे वर्तमान में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं।
इस घटना के बाद NMC में “प्रॉक्सी गवर्नेंस” यानी महिला प्रतिनिधियों के पीछे उनके पतियों द्वारा सत्ता संचालन को लेकर बहस तेज हो गई है। 50% महिला आरक्षण के बावजूद कई मामलों में महिलाओं की जगह उनके पति फैसले लेते दिखाई देते हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एक अन्य मामले में पूर्व कांग्रेस नगरसेवक अरुण डावरे भी अपनी पत्नी सीमा डावरे की अध्यक्षता वाली जोनल बैठक में मौजूद थे, जिससे यह मुद्दा और चर्चा में आ गया। हालांकि मुन्ना यादव ने सफाई देते हुए कहा कि वे केवल नए नगरसेवकों का मार्गदर्शन करने और लक्ष्मी नगर की गंभीर सीवर समस्या को उठाने पहुंचे थे।
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