Published On : Fri, Oct 12th, 2018

उधर राफेल पर रार, इधर नागपुर में दसॉल्ट की राडार निर्माता कम्पनी थेल्स पर सरकार उदार

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नागपुर : राफेल विमान सौदे को लेकर केंद्र सरकार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भले ही कड़े हमले हो रहे हो, लेकिन दूसरी तरफ बीजेपी सरकार इस डील को पूरा करने में किसी तरह की सुस्ती नहीं बरत रही है. राफेल विवाद के बीच दसॉल्ट के लिए रडार बनाने वाली कंपनी थेल्स को मिहान में उद्योग स्थापित करने की एनओसी मिली है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने भी इस प्रोजेक्ट को पास कर दिया है.

ऑफसेट एग्रीमेंट के तहत ही मिहान में राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट को अन्य तरह से सहयोग देने वाली दूसरी कंपनियां भविष्य में मिहान में निवेश करेगी. दसॉल्ट फाल्कन नाम के एक कमर्शिल विमान का भी निर्माण करती है. इस विमान के मेंटेनेंस का काम दसॉल्ट फ़्रांस की ही अन्य कंपनी सेगुला के साथ करती है, बताया जा रहा है कि ये कंपनी भी मिहान में निवेश कर सकती है.

उधर गुरुवार को इस सौदे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री को भ्रस्ट कह कर उनके इस्तीफ़े की मांग तक कर डाली. राफेल फाइटर विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट फ़्रांस की कंपनी है. राफेल अत्याधुनिक युद्ध विमान है जिसके लिए खास राडार की जरूरत होती है. ये राडार फ़्रांस की ही एक दूसरी कंपनी थेल्स बनाकर दसॉल्ट को उपलब्ध कराती है. भारत और फ़्रांस की सरकार के बीच हुए करार के मुताबिक भारत 36 राफेल विमान खरीदेगा. ये सौदा सीधा न होकर ऑफसेट एग्रीमेंट के तहत हुआ है. ऑफसेट एग्रीमेंट के लिए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस एविएशन लिमिटेड के साथ दसॉल्ट के बीच समझौता हुआ है. ऑफसेट एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक दसॉल्ट को लंबे समय के लिए भारत में निवेश करना होगा.

दसॉल्ट ने अनिल अंबानी की कंपनी के साथ रिलायंस एविएशन लिमिटेड नाम की संयुक्त कंपनी बनाई है, जो भारत में निवेश करेगी. इसी ऑफसेट एग्रीमेंट की शर्तों के तहत दसॉल्ट ने राडार उपलब्ध कराने वाली कंपनी थेल्स को नागपुर स्थित मिहान में अपना यूनिट स्थापित करने के लिए बाध्य किया है. बता दें कि नागपुर टुडे ने इस संबंध में 23 अगस्त 2018 को एक रिपोर्ट छापी थी, जिसमें कहा गया था कि जल्द ही निवेश की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.

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फ़्रांस के साथ राफेल विमान लेने का सौदा वर्ष 2015 में हुआ था जिसके बाद थेल्स कंपनी के अधिकारियों ने वर्ष 2016 में मिहान में दौरा किया था. लेकिन उसके बाद इस सौदे को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच कंपनी को जमीन आवंटन करने की गति कम हो गई थी. इस सौदे को लेकर अब विवाद और बड़ा हो गया है, बावजूद इसके सरकार ने इस सौदे को पूरा करने की गति में तेजी ला दी है.

पिछले महीने 20 सितंबर को एमएडीसी ने करार को मान्यता देते हुए इसे हरी झंडी दिखाई थी. उसके ठीक एक हफ़्ते बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले SEZ के विकास आयुक्त (डेवलपमेंट कमिश्नर ) ने भी अपनी एनओसी जारी कर दी. विकास आयुक्त कार्यालय के अनुसार थेल्स कंपनी के साथ हुए करार को मूर्तरूप दिया जा चुका है. करार के नियमों के मुताबिक आगामी 12 से 15 महीने के भीतर कंपनी को अपना उत्पादन शुरू कर देना होगा.

सूत्र बताते हैं कि प्रोजेक्ट को मान्यता देने में लगभग 2 वर्ष के समय लगने के पीछे की प्रमुख वजह राफेल से जुड़ा विवाद ही रहा, लेकिन अंततः सरकार ने इसमें तेजी दिखाई है. केंद्र और राज्य सरकार के अधीन आने वाले विभागों के अधिकारियों को जल्द काम करने का आदेश दिया गया था.

… By Divyesh Dwivedi

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