Published On : Fri, Dec 15th, 2017

नागपुर के होटल बने एमएलए होस्टल, सरकार का पैसा हो रहा बर्बाद

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MLA Hostels, Nagpur Hotels
नागपुर: नागपुर में शीतसत्र अधिवेशन अपने पूरे शबाब पर है, विपक्ष लगातार जहां आक्रामक तेवर अख़्तियार किए हुए है वहीं सत्तापक्ष भी लगातार बचाव और भिड़ने के लिए तैयार खड़ा रहता है. इन सबसे निबटने के बाद जो समय बचता है वह एक आरामदायक और लग्ज़री में बिताने की ख़्वाहिश विधायकों की होती है. लेकिन मंत्रियों, विधायकों से लेकर आलाधिकारियों तक के रुकने ठहरने के लिए रवि भवन, नाग भवन आदि की व्यवस्था होती है, लेकिन अधिकांश लग्ज़री के लिए प्रायवेट होटलों में रुकना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं. इस प्रवृत्ति के कारण इन सरकारी इमारतों का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है. करदाताओं से जमा की गई बड़ी रकम से विधायक निवास और रवि भवन जैसे सरकारी आवासों की मरम्मत और रीनोवेशन का कार्य किया जाता है, लेकिन इनका सही व्यक्ति द्वारा उपयोग ना किए जाने से जनता के पैसों की बर्बादी होती है. सूत्र बताते हैं कि इस काम के लिए हर साल बड़ी मात्रा में पैसे ख़र्च किए जाते हैं फिर भी विधायक आदि इनमें रुकना पसंद नहीं करते. सूत्र तो यहां तक दावा करते हैं कि ना केवल मालिक बल्कि नौकर भी मालिक के बहाने नौकरों को भी कमरा देना पड़ता है.

होटलवालों की चिंता
शहर के कई होटल संचालकों को राजनीतिज्ञों, एमएलए आदि के ठहरने से चिंता भी बढ़ गई है. होटल प्रबंधन को सबसे ज़्यादा डर बिल के भुगतान की सता रही है जो अक्सर नेताओं द्वारा नहीं चुकाए जाते. वहीं दूसरी ओर इस सीजन में होटलों में कमरों की डिमांड अधिक रहती है, जिससे इन नेताओं के लिए मैनेज करना एक बड़ी चुनौती साबित होती है. इससे कई बार होटल स्टाफ़ और नेताओं के पीए के बीच बहस हो जाती है. हालही में होटल रेडिसन में एक विधायक ने रूम पाने के लिए वहीं के वहां स्टाफ़ से खूब झगड़ा किया वह भी तब जब होटल में कोई रूम उपलब्ध नहीं था.

इस घटना के साक्षीदार सूत्र के मुताबिक विधायक वहां रुकने के लिए अड़ा हुआ था और होटल एक्ज़िक्यूटिव जो होटल मालिक का रिश्तेदार भी है से उलझ रहा था. केवल यही नहीं वह वहां रखे टैंट्रम को फैंकने हुए अपशब्द भी कहने लगा. इस बीच विधायक के साथियों ने बीचबचाव कर मामले को शांत किया. बताया जाता है कि संबंधित विधायक ने अपने अधिकृत विधायक निवास में चेकइन तक नहीं किया था.

हर नेता के क़रीबियों को भी लग्ज़री का साथ मिले ऐसा नहीं है. कमरे उपलब्ध ना होने से नेताओं के पीए लोगों को अंत में घूम फिरकर विधायक निवास में ही रुकना पड़ता है.

नागपुर टुडे का दृष्टिकोण
ऐसे समय जब राज्य सरकार भीषण वित्तीय संकट के दौर से गुज़र रही हो तब नेताओं के लिए बंगलों और एमएलए होस्टल के लिए पैसे बर्बाद करना अपनेआप में फ़िज़ूल खर्ची प्रतीत होती है. इनमें से कई होटलों की ओर रुख़ कर लेते हैं. इससे सरकारी ख़ज़ाने में सेंध लगी रहती है. इससे बेहतर होगा कि इन इमारतों को निजी हाथों में सौंप कर कुछ पैसा कमाया जा सकता है. इसमें कोई तुक नहीं बनता कि जनता की गाढ़ी कमाईकर के रूप में जमा कर को फ़िज़ूल खर्ची में लुटाया जाए

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