नागपुर खंडपीठ ने संदीप ड्वेलर्स और अग्रवाल परिवार की याचिका खारिज की; कहा- समझौते का लाभ लेने के बाद उसकी शर्तों से पीछे नहीं हट सकते

नागपुर, 31 अक्टूबर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई डेवलपर लेआउट की मंजूरी के लिए प्राधिकरण की शर्तें स्वीकार करता है, समझौते पर हस्ताक्षर करता है और निर्धारित राशि जमा कर देता है, तो बाद में वह इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज को चुनौती नहीं दे सकता।
जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस रजनीश आर. व्यास की खंडपीठ ने मौजा लावा, जिला नागपुर में जमीन के विकास के लिए नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (NMRDA) द्वारा लगाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
क्या था पूरा मामला?
संदीप ड्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड और अग्रवाल परिवार के सदस्यों ने NMRDA द्वारा लगाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी जमीन का एक हिस्सा पहले किफायती आवास के लिए आरक्षित था, लेकिन बाद में यह आरक्षण हटा दिया गया। ऐसे में NMRDA द्वारा उक्त जमीन पर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट वसूलना उचित नहीं है।
वहीं, NMRDA ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित जमीन R-4 रेजिडेंशियल जोन में आती है और लागू विकास नियमों के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज देना अनिवार्य है।
समझौते का लाभ लेकर शर्तों को चुनौती नहीं दे सकते
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने लेआउट मंजूरी प्राप्त करने के लिए प्राधिकरण की शर्तें स्वीकार की थीं। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट के भुगतान संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए और निर्धारित राशि भी जमा की थी। इसके बाद उन्हें परियोजना की मंजूरी मिली।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता समझौते का लाभ उठाने के बाद उसकी शर्तों को चुनौती नहीं दे सकते। याचिकाकर्ताओं की ओर से ऐसा कोई प्रमाण भी पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि समझौता धोखाधड़ी या दबाव में कराया गया था।
सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं के लिए है चार्ज
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विकसित हो रहे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज वसूला जाता है। इसके माध्यम से प्राधिकरण सड़क, पानी की आपूर्ति, बिजली और ड्रेनेज जैसी सुविधाओं के विकास पर खर्च करता है।
अदालत ने माना कि महाराष्ट्र प्रादेशिक एवं नगर रचना अधिनियम (MRTP Act) और लागू विकास नियमों के तहत इस प्रकार का चार्ज वसूलना उचित है।
याचिका में कोई ठोस आधार नहीं पाए जाने पर हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
दोनों पक्षों की ओर से किसने की पैरवी?
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट कार्तिक शुक्ला के साथ राघव भांडरकर ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील (AGP) टी.एच. खान और NMRDA की ओर से एडवोकेट गिरीश कुंटे अदालत में पेश हुए।



