- करोड़ों की जब्ती के बावजूद नहीं थम रहा मौत का कारोबार, आखिर किसके संरक्षण में पल रहे ड्रग्स माफिया?
- छोटे सप्लायर सलाखों के पीछे, लेकिन बड़े चेहरे अब भी कानून की पकड़ से दूर
- युवाओं को नशे का गुलाम बनाकर उन्हीं से करवाई जा रही सप्लाई
Nagpur : शहर में नशे का जहर अब केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक संगठित और खतरनाक ड्रग्स सिंडिकेट का रूप ले चुका है। पुलिस की लगातार कार्रवाई, छापेमारी और करोड़ों रुपये के ड्रग्स की जब्ती के बावजूद शहर में नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि कार्रवाई के बाद भी ड्रग्स माफिया बेखौफ होकर अपना नेटवर्क संचालित कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस पूरे रैकेट के पीछे कौन लोग हैं? और क्यों अब तक कानून के शिकंजे से बाहर हैं?
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच नागपुर पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ 110 मामले दर्ज करते हुए 3 करोड़ 41 लाख 22 हजार 780 रुपये का माल जब्त किया। इस दौरान 143 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आंकड़े कार्रवाई को मजबूत जरूर दिखाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर में ड्रग्स सप्लाई का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है।
एमडी ड्रग्स ने युवाओं को बनाया सबसे बड़ा निशाना
नागपुर में सबसे तेजी से फैल रहा नशीला पदार्थ है एमडी यानी मेफेड्रोन। यह सिंथेटिक ड्रग युवाओं और कॉलेज छात्रों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में एमडी की बिक्री में विस्फोटक बढ़ोतरी हुई है।
- वर्ष 2024 में करीब 6.50 करोड़ रुपये का ड्रग्स जब्त हुआ
- वर्ष 2025 में लगभग 7.50 करोड़ रुपये का ड्रग्स पकड़ा गया
- इन जब्तियों में सबसे बड़ा हिस्सा एमडी का रहा
यह साफ संकेत है कि नागपुर अब केवल ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि ड्रग्स वितरण का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
‘ऑपरेशन थंडर’ के बावजूद सक्रिय है नेटवर्क
पुलिस आयुक्त Ravinder Kumar Singal के निर्देश पर शुरू किए गए ‘ऑपरेशन थंडर’ के तहत पुलिस की विशेष टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। गुप्त सूचनाओं और संदिग्ध इलाकों में दबिश देकर कई तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर ड्रग्स शहर तक पहुंच कैसे रहा है?
सूत्रों की मानें तो कार्रवाई अधिकतर छोटे पेडलर्स और लोकल सप्लायर्स तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े चेहरे अब भी पर्दे के पीछे सुरक्षित हैं। यही वजह है कि हर कार्रवाई के बाद कुछ दिन शांति रहती है और फिर वही नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो जाता है।
नशे के आदी युवाओं को ही बनाया जा रहा ‘पेडलर’
इस पूरे सिंडिकेट का सबसे खतरनाक पहलू इसकी कार्यप्रणाली है। पहले युवाओं और कॉलेज छात्रों को एमडी जैसे घातक ड्रग्स की लत लगाई जाती है। जब वे पूरी तरह नशे के शिकंजे में फंस जाते हैं, तब उन्हें पैसों का लालच देकर या दबाव बनाकर सप्लाई चेन में शामिल कर लिया जाता है।
यानी जो युवक पहले ग्राहक होते हैं, वही आगे चलकर ड्रग्स बेचने वाले ‘पेडलर्स’ बन जाते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ कुख्यात अपराधी इस कारोबार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इतना ही नहीं, नाबालिग बच्चों तक को इस नेटवर्क में धकेला जा रहा है, जिसे समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत माना जा रहा है।
अपराध और ड्रग्स का गठजोड़ बना बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग्स तस्करी केवल नशे तक सीमित अपराध नहीं है। इसके साथ चोरी, लूट, गैंगवार, वसूली और हिंसक अपराधों का सीधा संबंध होता है।
नागपुर में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क के कारण कानून-व्यवस्था पर भी खतरा मंडराने लगा है। युवा पीढ़ी तेजी से नशे की दलदल में फंस रही है और इसका असर सामाजिक ढांचे पर साफ दिखाई देने लगा है।
अप्रैल के तीन हफ्तों में लाखों का एमडी जब्त
1 जनवरी से 21 अप्रैल 2026 के बीच पुलिस ने 22 मामलों में 1 करोड़ 46 लाख 17 हजार 520 रुपये कीमत का करीब 1 किलो 699 ग्राम एमडी जब्त किया। इस दौरान 28 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि केवल अप्रैल महीने के शुरुआती तीन हफ्तों में ही 37 लाख रुपये कीमत का 68 ग्राम 84 मिलीग्राम एमडी पकड़ा गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर में ड्रग्स सप्लाई कितनी तेजी से बढ़ रही है।
आंकड़े जो नागपुर की चिंता बढ़ा रहे हैं
| कार्रवाई | आंकड़े |
|---|---|
| कुल दर्ज मामले | 110 |
| गिरफ्तार आरोपी | 143 |
| जब्त गांजा | 346 किलो 799 ग्राम |
| जब्त एमडी | लगभग 1 किलो 699 ग्राम |
| नशीले पदार्थों की कीमत | ₹2.29 करोड़ |
| वाहन, नकद आदि | ₹1.11 करोड़ |
| कुल जब्ती | ₹3.41 करोड़ |
ड्रग्स नेटवर्क का खतरनाक मॉडल
युवा को नशे की लत → आर्थिक दबाव → सप्लाई चेन में एंट्री → पेडलर में तब्दील → नए युवाओं को टारगेट
केवल छोटे खिलाड़ियों पर कार्रवाई नहीं, अब ‘ड्रग्स के असली आकाओं’ तक पहुंच जरूरी
नागपुर में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क ने यह साफ कर दिया है कि केवल सड़क स्तर पर कार्रवाई करने से यह कारोबार खत्म नहीं होने वाला। जब तक इस चेन के पीछे बैठे बड़े सप्लायर, फाइनेंसर और नेटवर्क संचालकों तक पुलिस नहीं पहुंचेगी, तब तक यह मौत का कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
आज जरूरत केवल गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि ड्रग्स सिंडिकेट की जड़ों पर निर्णायक प्रहार करने की है… क्योंकि अगर यह जहर इसी रफ्तार से फैलता रहा, तो आने वाले वर्षों में इसकी सबसे बड़ी कीमत शहर की युवा पीढ़ी को चुकानी पड़ेगी।








