
नागपुर – नागपुर में कांग्रेस पार्षद शुभम मोटघरे के निवास पर गोलीबारी के मामले में पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए गिरफ्तार सात आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई की है। शहर के श्रावणनगर इलाके में हुई इस फायरिंग की वारदात ने राजनीतिक और आपराधिक हलकों में हलचल मचा दी थी। अब मामले की जांच के दौरान संगठित गिरोह की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मकोका की धाराएं जोड़ दी हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद की गई। मामले की जांच क्राइम ब्रांच यूनिट-5 को सौंपी गई थी। तकनीकी विश्लेषण और अन्य जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की। जांच में फरार आरोपी विशाल उर्फ फल्ली गुप्ता पर कथित तौर पर फायरिंग की सुपारी देने का आरोप सामने आया है।
इस मामले में पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे-पाटिल के नेतृत्व में शहर में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में उठाए गए कदमों के बीच यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, मामले में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना बाकी है।
आधी रात को पार्षद के घर पर हुई थी फायरिंग
मामला 26 अगस्त 2026 की देर रात करीब 12.42 बजे का है। भांडेवाड़ी थाना क्षेत्र के श्रावणनगर में कांग्रेस पार्षद शुभम मोटघरे अपने घर की ऊपरी मंजिल के हॉल में मौजूद थे। इसी दौरान उनके घर की गैलरी की ओर गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
गोली गैलरी में लगे कांच को भेदते हुए निकल गई। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पार्षद के निवास पर हुई इस गोलीबारी को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू की।
घटना के बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में मोपेड पर सवार दो युवक स्वामी नारायण मंदिर मार्ग की ओर जाते दिखाई दिए। पुलिस ने इस फुटेज सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों का पता लगाने की कोशिश की।
प्राथमिक जांच में यह आशंका सामने आई कि वारदात को अंजाम देने के पीछे पार्षद को निशाना बनाने की साजिश हो सकती है। इसी दिशा में आगे की जांच की गई।
फरार आरोपी विशाल उर्फ फल्ली गुप्ता पर सुपारी देने का आरोप
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, श्रावणनगर निवासी फरार आरोपी विशाल उर्फ फल्ली गुप्ता ने कथित तौर पर अंकुश और ऋषभ को पार्षद के घर पर फायरिंग करने की सुपारी दी थी।
पुलिस के अनुसार, इस कथित साजिश में अशोक उर्फ बाबा यादव, सहेली पंधरम उर्फ सोनू और अनिकेत उर्फ अन्नू बिहारे के नाम भी सामने आए हैं।
जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ, किसकी क्या भूमिका थी और घटना के पीछे किन परिस्थितियों में साजिश रची गई।
फिलहाल विशाल उर्फ फल्ली गुप्ता को फरार बताया गया है। उसके संबंध में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध से संबंधित प्रावधान लागू किए हैं।
मकोका की तीन धाराएं जोड़ी गईं
जांच में संगठित गिरोह की कथित भूमिका सामने आने के बाद गिरफ्तार सात आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धारा 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) जोड़ी गई हैं।
मकोका का उद्देश्य संगठित अपराध की गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। इस कानून के तहत कार्रवाई किए जाने से मामले की कानूनी गंभीरता बढ़ जाती है और आरोपियों के खिलाफ आगे की प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार चलती है।
हालांकि, मकोका की धाराएं लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी दोषी सिद्ध हो चुके हैं। उनकी दोषसिद्धि का फैसला अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
नागपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं सातों आरोपी
इस प्रकरण में गिरफ्तार सात आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
अंकुश झनक तोमस्कर (30 वर्ष)
ऋषभ उर्फ ऋषि विशाल नागदेवे (24 वर्ष)
अमित मधुकर ठाकरे (22 वर्ष)
कार्तिक बबलू तोमस्कर (26 वर्ष)
ऋषभ भगवती पेथेल (30 वर्ष)
केतन दुर्गाप्रसाद माटे (24 वर्ष)
रोमित उर्फ फुल्ल्या मुनेश्वर वाहाने (21 वर्ष)
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सभी सातों आरोपी नागपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। अब उनके खिलाफ मकोका के प्रावधानों के तहत भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
देसी पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद
इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से करीब 60 हजार रुपये मूल्य की देसी पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किए थे।
फायरिंग के मामले में हथियार की बरामदगी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस हथियार के इस्तेमाल, आरोपियों के बीच संपर्क और वारदात में उनकी कथित भूमिका से संबंधित तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
जांच में तकनीकी साक्ष्यों के साथ अन्य उपलब्ध सबूतों को भी शामिल किया गया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है।
4 सितंबर को क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी जांच
फायरिंग की घटना के बाद भांडेवाड़ी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके बाद 4 सितंबर 2026 को मामले की जांच क्राइम ब्रांच यूनिट-5 को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई।
क्राइम ब्रांच ने तकनीकी विश्लेषण और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका की जांच की। इसके बाद सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
अब संगठित अपराध से संबंधित धाराएं जोड़े जाने के बाद मामले की जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। पुलिस के सामने फरार आरोपी को लेकर आगे की कार्रवाई करने के साथ-साथ कथित साजिश से संबंधित सभी पहलुओं की जांच करने की चुनौती भी है।
पुलिस की कार्रवाई से अपराधियों को सख्त संदेश
किसी जनप्रतिनिधि के निवास पर गोलीबारी की घटना कानून-व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मानी जाती है। इस तरह की वारदात से संबंधित जांच में पुलिस के सामने न केवल हमलावरों की पहचान करने, बल्कि घटना के पीछे की कथित साजिश और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका का पता लगाने की जिम्मेदारी भी होती है।
नागपुर पुलिस ने इस प्रकरण में गिरफ्तार सात आरोपियों के खिलाफ मकोका की धाराएं जोड़कर मामले को गंभीरता से लेने का संकेत दिया है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल फरार आरोपी विशाल उर्फ फल्ली गुप्ता की गिरफ्तारी और कथित साजिश से जुड़े सभी पहलुओं का खुलासा है। पुलिस जांच के अगले चरण में इन बिंदुओं पर क्या सामने आता है, इस पर मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी।



