Published On : Fri, Aug 14th, 2020

आयुक्त तुकाराम मुंढे से परेशान नागपूर शहर का व्यापारी

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– मुंडे हटाओ,नागपुर बचाओ के नारे लग रहे

नागपुर – नागपूर शहर में निश्चित ही कोरोना का कहर बढ गया है । मरीज और मौत कीं संख्या अचानक से काफी ज्यादा हुई है । हर किसीं को ऐहतियात रखना जरुरी है । दुर्भाग्यवश कुछ लोग मामले की पेचीदगी को समझते नहीं । ऐसे नासमझ नागरिक पर निश्चित रूप से कार्यवाही होनी चाहिये ।

ज्वलंत सवाल यह हैं कि किंतु व्यापारी हर मार क्यों झेले ? कोरोना काल में व्यापार और व्यापारी दोनो की क्या हालत हुई , यह सभी को पता है । आज जैविक खर्चे चलाना पहाड़ तोड़ने जैसा लगता है । फ़िर आ गयी स्कूल की फीस , माँ-पिता की दवाई , कर्ज की EMI, GST, IT, ST, बिजली बिल , मोबाईल बिल, घर खर्च , नौकर की पगार , दुकान/घर का भाडा , रोज के खर्च , कोई नये खर्च ( गरिबी में आटा गिला वाले ) इत्यादी- इत्यादी।

किंतु यहा सूची खत्म नहीं हुई । अब नये खर्च सुरू हुये है । मुंढे वाले खर्च..। यह खर्च ऐसे वसुले जाते है मानो व्यापारी धंधा नहीं चोरी करता है । ऑड-इव्हन के चलते कोई गलती हो गयी तो ‘ वसुली ‘ । (वैसे यह तुघलकी कायदा सिर्फ नागपूर में लागू है । मुंबई , पुणे, नाशिक , नवी मुंबई , औरंगाबाद , कल्याण , आदी शहर से भी यह कायदा हद्दपार किया गया है) कभी कभी तो मुंढे खुद सडक पर अपनी PR टीम के साथ वसुली करने निकलते है। ठेकेदार को दी जाने वाली तकलीफ तो जगजाहीर है ।

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अब आया है ‘कोरोना जांच’ वाला खर्च । व्यापारी को १८ तारीख तक सभी कर्मचारी का कोरोना जांच करवाना अनिवार्य होगा। अन्यथा मुंढे फ़िर अपने दसते के साथ वो करेंगे जिसके लिये वे कुप्रसिद्ध है । पर क्या इतनीं सारी जांच संभव है ? इसका खर्च मंदी के इस माहौल में सहना आसान नही ?

व्यापारी वर्ग की समितियां , जनप्रतिनिधियों तो अब वीडियो भेज महानगरपालिका के “संदेशवाहक ” हो गये है । हमेशा समर्थन करते है या हलका विरोध । अपितू वक्त आ गया है कड़ा विरोध करने का । सब जानते है की जो मुंढे साहेब कर रहे है वो सरासर ज्यादती है । ऐसा नहीं है की मुंढे के खिलाफ मन में कोई मलाल है । हम सभी ने एक समय उनका समर्थन भी किया है ।

जब अपनी समस्या हमारे चुने हुये नेता तक भेज तो फायदा नहीं। जनप्रतिनिधी भी परेशान है। क्योंकि मुंढे तो सूनते ही नहीं । जनप्रतिनिधी भी कितनी गुहार करेंगे ?

आयुक्त मुंढे , जरा व्यापारी को इंसान समझने का कष्ट करें । इसी के भरे हुए टॅक्स से आपकी पगार होती है अन्यथा आत्महत्या करने का कोई ऐसा तरीका बता दे, जिससे यह व्यापारी बिना दर्द मुक्ती पा लें।

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