Published On : Mon, Aug 6th, 2018

MBBS में OBC आरक्षण पर सुको की रोक

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Nagpur Bench of Bombay High Court

नागपुर: संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ओबीसी के लिए भले ही 27 प्रतिशत का आरक्षण रखा गया हो, लेकिन वैद्यकीय पाठ्यक्रम प्रवेश में राज्य के वैद्यकीय शिक्षा विभाग की ओर से ओबीसी के लिए केवल 1.7 प्रतिशत आरक्षण रखे जाने को चुनौती देते हुए अखिल भारतीय ओबीसी महासंघ और ओबीसी छात्रा राधिका राऊत की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई.

याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे असि. सालिसिटर जनरल उल्हास औरंगाबादकर ने अदालत को बताया कि इस जनहित याचिका की कार्यवाही पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से रोक लगाई गई है, जिसके बाद न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी और न्यायाधीश झका हक ने 23 अगस्त तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. पुरुषोत्तम पाटिल ने पैरवी की.

केंद्रीय वैद्यकीय महाविद्यालयों में है 27 प्रतिशत
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के सहायक वैद्यकीय शिक्षण संचालक डॉ. बी. श्रीनिवास स्वामी की ओर से दायर किए गए हलफनामा में बताया गया कि केंद्रीय वैद्यकीय महाविद्यालय और डीम्ड यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रम में अखिल भारतीय कोटे की कुल सीटों पर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण है. इसी के आधार पर खुले वर्ग की 3388 सीटों में से 920 सीटों पर ओबीसी छात्रों को जगह दी गई.

दारुस्लम एजुकेशन ट्रस्ट की ओर से दायर मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 9 मई 2017 को फैसला दिया था, जिसके अनुसार केंद्रीय वैद्यकीय महाविद्यालय और डीम्ड यूनिवर्सिटी में 15 प्रतिशत सीटे अखिल भारतीय स्तर पर भरी जाती हैं. इनमें कुल सीटों में से 15 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, 7.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति और 27 प्रतिशत सीटें ओबीसी प्रवर्ग से भरी जाती हैं.

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4064 में से केवल 69 सीटें
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधि. पाटिल ने बताया कि राज्य सरकार के वैद्यकीय शिक्षा विभाग ने वैद्यकीय पाठ्यक्रम में प्रवेश को लेकर आरक्षण नीति के अनुसार मार्गदर्शक सूचनाएं जारी की है. जिसके अनुसार ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देना अनिवार्य है.

लेकिन एमबीबीएस के प्रवेश के लिए निर्धारित की गई सीटों का आंकलन किया जाए, तो राजल्लय के वैद्यकीय पाठ्यक्रम में 4064 सीटों में से केवल 1.7 प्रतिशत के अनुसार कुल 69 सीटें ही ओबीसी के हिस्से में आ रही है.

राज्य सरकार की बेतरतीब कार्यप्रणाली के कारण ओबीसी छात्रों का नुकसान हो रहा है. प्रवेश के लिए ऑनलाइन पद्धति होने के कारण इस संदर्भ में प्रवेश की प्राथमिक प्रक्रिया में ही छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है.

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