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    Published On : Fri, Jul 28th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    गांधीबाग बगीचे को लेकर शुरू हुआ एकाधिकार आंदोलन

     
    •  विकास के नाम पर लोटस कल्चरल एंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन कर रहा उगाही : बैसवारे
    •  गांधीबाग उद्यान के विकासकार्य पर आरोप-प्रत्यारोप पर पूर्व महापौर प्रवीण दटके का खुलासा

    Gandhibagh Garden

    नागपुर: जनविकास परिषद, गांधीबाग बगीचा बचाओ समिति के तत्वाधान में विगत कुछ दिनों से धरना-आंदोलन शुरू है। इस आंदोलन का नेतृत्व भोला बैसवारे, पूर्व स्थाई समिति अध्यक्ष रवि पैगवार आदि कर रहे हैं। उक्त दोनों ने गांधीबाग उद्यान के रखरखाव व विकास के नाम पर लोटस कल्चरल एंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन पर पैसा हजम करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों को लेकर मनपायुक्त अश्विन मुदगल से मुलाकात की गई और शासकीय निधि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया। इस दौरान मांग की गई कि बग़ीचे का संचालन खुद मनपा अपने हाथ में ले। आरोप ये भी लगाए गए कि गांधीबाग बगीचे की संपत्ति हड़पने की साजिश की जा रही है। उसे सार्वजनिक करने के लिए आंदोलन किया जायेगा।

    दूसरी ओर गांधीबाग बगीचे के सामने गत 4 दिनों से एक धरना आंदोलन शुरू है। कहा जा रहा है कि ये लोगों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है। साथ ही मनपा के कार्यों के बारे में भ्रम की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। आंदोलनकर्ताओं ने मुख्य रूप से राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के स्मारक, ओपन थिएटर,लम्यूजिकल फाउंटेन आदि विषयों पर आरोप लगाए, जो पूर्णरूपेण बेबुनियाद है। उक्त जानकारी पूर्व महापौर प्रवीण दटके ने दी है।

    दटके के अनुसार गुरुदेव सेवा आश्रम के माध्यम से गत अनेक वर्षों से एक मांग थी कि गांधीबाग बगीचे का नामकरण राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने किया। इसलिए वहां उनका स्मारक बनाया जाए।

    उल्लेखनीय यह है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के बाद नागपुर शहर में सर्वाधिक दंगे महल इलाके में हुए।कारण वहां ब्राह्मण समाज की बस्तियां ज्यादा थी। उन दंगों को शांत करने के लिए राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने वर्तमान गांधीबाग परिसर,जो उस समय लेंडी तलाब के नाम से जाना जाता था, की साफ-सफाई और जगह समतल कर वहां शांति सप्ताह मनाया गया। साइकिल से घूम-घूम कर साम्प्रदायिक सौहार्द बनाने की बातें कर श्रमदान व सफाई का महत्व बताया जिसके आधार पर इस बगीचे का नाम गांधीबाग कथा गया। इसके बाद बगीचा तो बना लेकिन नामकरण पहले हो गया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को दर्शाते हुए वहां राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज का स्मारक बगीचे में बनाया गया। उस स्मारक में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के सफाई अभियान, शांति सप्ताह मूल छायाचित्रों की फायबर मोल्डिंग कर म्यूरल तैयार कर परिसर में लगाया गया। पूर्व स्थाई समिति अध्यक्ष बंडू राऊत के कार्यकाल में प्रस्तुत बजट में इस कार्य के लिए 50 लाख रुपये की राशि का प्रावधान किया गया था।

    दटके ने आगे कहा कि इस राशि में से 37 लाख 74 हजार 742 रुपये के कार्यादेश जारी किए गए थे। जिसमें से विविध स्थापत्य कामों के लिए 19 लाख 37 हजार 294 रुपये, जिसमें वॉटर बॉडी, पैडस्टल, उद्यान की सुरक्षा दीवार,फेंसिंग आदि कार्यों का खर्च शामिल है। उसी परिसर में 7 लाख 99 हजार 980 रुपये का फ़व्वारा लगाना प्रस्तावित है। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के जीवन चरित्र पर आधारित म्युरल के लिए 2 लाख 75 हजार 600 रुपये और परिसर की अत्याधुनिक प्रकाश व्यवस्था के लिए 4 लाख रुपये की राशि का नियोजन किया गया है। इन कार्यो में से प्रकाश व्यवस्था छोड़कर बाकी सभी कार्य पूर्णता की ओर है। इसी काम में पूर्व स्थापित गाय की प्रतिमा को पेंट करना, उसकी मरम्मत करने का भी समावेश है।इस प्रकार इन कार्यों पर 37 लाख 74 हजार 742 रुपये का कार्य किया जा चुका है। परंतु केवल गाय को पेंट मारने में 39 लाख रुपए खर्च कर दिए जाने का बेबुनियाद आरोप लगाया जा रहा है।

    गांधीबाग बगीचे के उद्घाटन के समय वर्ष 1998 में संगीत युक्त फ़व्वारा लगाया गया था,जो गत 2-3 वर्षों से ठीक से काम नहीं कर रहा था। साथ ही अत्याधुनिक तकनीक के कारण पुराने फाउंटेन के स्पेयर पार्ट्स भी नहीं मिल रहे थे। इसलिए सांसद अजय संचेती के सांसद निधि से 32 लाख 33 हजार 767 रुपये से नए संगीत युक्त फ़व्वारे को लगाया गया है। लगाए गए फव्वारे स्थल पर नए लॉन लगाने का कार्य जारी है, इसलिए फ़व्वारा बंद रखा गया है।

    गांधीबाग परिसर में ही वर्ष 2007 के मनपा बजट में देश के आजादी के पहले स्वतंत्र संग्राम अर्थात 1857 के स्वतंत्रता का एक स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया था। तब से हर बजट में प्रतिवर्ष उस कार्य के लिए राशि का नियोजन होता है लेकिन किसी कारण कार्य अब तक प्रारंभ नहीं हो सका है। वर्ष 2013-14 में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के स्मारक का कार्य प्रारंभ हुआ एवं 1857 की लड़ाई यहां हिन्दू राजा और मुस्लिम राजा ने मिलकर लडी थी, बहादुरशाह जफर को दिल्ली की तख्त पर बैठाने के लिए नानासाहेब पेशवे, झांसी की रानी, तात्या टोपे आदि जैसे हिन्दू सैनानियों ने मदद की थी। इस हिन्दू, मुस्लिम एकता के इतिहास को उद्यान परिसर में प्रदर्शित करने के लिए एक लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए नियोजन किया गया है। जिस प्रकार दिल्ली के लाल किले के साबरमती आश्रम, गोलकुंडा फोर्ट, अंडमान निकोबार में लाइट एंड शो है,उसी की तर्ज पर एक लाइट एंड शो गांधीबाग बगीचे में की गई है। इस शो को देखने के लिए 500 दर्शक बैठने की व्यवस्था है, क्षमति भरने पर शो दिखाया जाता इस शो के संचालन के लिए अलग से एजेंसी नियुक्त की जाएगी, इस एजेंसी से बगीचा संचालन करने वाले का कोई संबंध नहीं होगा। इस संदर्भ में लगाए गए आरोप भी सरासर गलत हैं।

    दटके ने आगे बताया कि बगीचे में जो लॉन का काम शुरू है, यह लॉन 20 वर्ष पूर्व लगाया गया था। आज 20 साल बाद मनपा के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में नए सिरे से लॉन का कार्य जारी है। वर्तमान में सोख्ता भवन परिसर से लगी दीवार के पास अत्याधुनिक कचरे का बिन रखने का नियोजन है।

    – राजीव रंजन कुशवाहा

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