नागपुर: नागपुर महानगर पालिका के विवादित और पदोन्नति कि जांच झेल रहे पूर्व अतिरिक्त आयुक्त आर. झेड सिद्दीकी को नियमों को ताक पर रखकर अतिरिक्त आयुक्त बनाया गया था. आर. झेड सिद्दीकी के पदोन्नति के विषय में नगरविकास मंत्रालय द्वारा जांच के आदेश दिए गए हैं. वह जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि मनपा ने मनमाने तरीके से सिद्दीकी को एनईएसएल (नागपुर एनवायर्नमेंटल सर्विसेज लिमिटेड) का डायरेक्टर नियुक्त कर दिया. यही नहीं पूरी तरह से नियमों की अवहेलना कर, जैसा कि उन्हें इससे पहले भी मनपा मे अतिरिक्त आयुक्त का पद दिया गया था और वो सेवानिवृत्त हैं.
केंद्रीय जनविकास पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश निरीक्षक चेतन राजकारणे ने इस मामले से जुड़े सारे दस्तावेज मनपा और मंत्रालय द्वारा आरटीआई के तहत हासिल किया. शासन निर्णय नुसा मनपा में करार पद्धति द्वारा प्रतिनियुक्त या नामांकित होने के कारण उस पदाधिकारी को प्रशासकीय या वित्तीय अधिकार प्रदान करने की अनुमती नही है. बावजुद इसके मनपा द्वारा सिद्दीकी को अतिरिक्त आयुक्त पद से रिटायरमेंट के पहले ही एनईएसएल के डायरेक्टर का पद देने के लिए प्रस्ताव मनपा के प्रशासकीय समिति के प्रस्ताव में विचाराधीन रख दिया था. मनपा ने विशेष मामला कहकर सिद्दीकी को रिटायरमेंट के बाद प्रशासकीय व वित्तीय अधिकार के साथ मियाद बढ़ाने और करार पध्दति पर नियुक्ति करने के लिए मंजूरी प्रदान करने के लिए मंत्रालय में प्रस्ताव भेज दिया. जबकि नियमों के अनुसार करार पद्धति में किसी भी अधिकारी व कर्मचारी को वित्तीय अधिकार और सुविधा और अन्य तरह के लाभ नहीं दिए जा सकते हैं. इस पूरे मामले में ख़ास बात यह है कि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देगी ही ऐसा प्रस्ताव मनपा के पदाधिकारियों द्वारा लिख सभागृह मे प्रस्ताव पारित भी किया गया था याने शासन मंजूरी मिलने से पहले ही मंजूरी के संकेत प्रस्ताव भेजनेवाले पदाधिकारियों को मिल चुकी थी.
चेतन राजकारणे का यह भी सवाल उठाया कि शासकिय सेवा नियम और निर्देश के अनुसार पदोन्नति, नियुक्ति की सेवा नियमों को क्या सभागृह ने प्रस्ताव पारित कर के कभी मंजूरी प्रदान की है?
नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त होने के बाद या स्वेच्छा निवृत्ति लेने के बाद किसी भी अधिकारी, कर्मचारी को किसी भी परिस्थिति में पुनर्नियुक्ति नहीं दी जा सकती. बावजूद इसके सिद्दीकी के लिए पहले भी और अब भी सभी नियमों को ताक पर रखने का काम मनपा और राज्य सरकार कर रही है. राजकारने ने कहा कि सरकार जब तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देती तब तक सिद्दीकी को किसी भी तरह के पद पर नियुक्त करना और उन्हें आर्थिक मुआवजा, प्रशासकीय प्रतिष्ठा और पद के अनुसार मिलने वाली सुविधा देना उचित नहीं है जिस से मनपा के आर्थिक ढाचा और क्षतिग्रस्त हो.
राजकारने ने बताया कि 2 मई 2018 को तत्कालीन आयुक्त ने अपने प्रस्ताव में सिद्दीकी को एनईएसएल के संचालक पद के लिए मान्यता देने का प्रस्ताव प्रधान सचिव नगर विकास 2 मुंबई को भेजा था. यह नियुक्ति पूरी तरह से संदेहास्पद है क्योंकि मनपा के आम सभा ने अपने प्रस्ताव में अतिरिक्त आयुक्त के पद को मंजूरी दी है और प्रशासन ने संचालक पद पर नियुक्ति की है. अब ऐसे में उम्मीद यह लगाई जा रही है कि मनपा को सिद्द्दीकी को आम सभा द्वारा मनोनीत कर कार्यकारी समिति की सिफारिश पर (एनईएसएल) संचालक पद पर नियुक्त नहीं करना चाहिए.
राजकारने ने आगे कहा कि ऐसी घोर अनियमितता की जांच प्रधान सचिव नगर विकास के नेतृत्व में या समकक्ष के नेतृत्व में होनी चाहिये और दोषी तथा विकृत कार्यवाही को आश्रय देनेवाले अधिकारियों को गंभीरता पूर्वक दंडित किया जाना चाहिए ऐसी मांग चेतन राजकारणे ने राज्य के मुख्यमंत्री से की है. अन्यथा न्याय के लिए और जनता के पैसों का दुरुपयोग रोकने के लिए वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
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