नागपुर: माइनिंग एक्सप्लोसिव एंड एसेसरी सप्लाई एजेंसी के अनुराग बघेल और अभिषेक बघेल को जिला न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। चेक बाउंस मामले में दर्ज शिकायत को खारिज करने की उनकी मांग कोर्ट ने ठुकरा दी। आरोपियों की दलील थी कि चेक उनके दिवंगत पिता द्वारा जारी किया गया था और उनका इससे कोई संबंध नहीं है। हालांकि कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और शिकायत को वैध माना।
बचाव पक्ष की दलीलें:
बचाव पक्ष ने कहा कि:
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विवादित चेक पर अनुराग या अभिषेक के हस्ताक्षर नहीं हैं।
चेक उनके पिता द्वारा जारी किया गया था, जिनकी मृत्यु नवंबर 2021 में हो चुकी है।
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जिस खाते से चेक जारी हुआ वह खाता न तो अनुराग का है, न ही अभिषेक का।
दोनों अभियुक्त उस समय कंपनी के मालिक नहीं थे और न ही खाते से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे।
कोर्ट का निष्कर्ष:
कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा दी गई सामग्री की आपूर्ति किसी व्यक्तिगत व्यक्ति को नहीं, बल्कि “मेसर्स माइनिंग एक्सप्लोसिव एंड एसेसरीज सप्लाई एजेंसी” नामक फर्म को की गई थी।
यह लेन-देन एक व्यावसायिक सौदा था, और अभियुक्त साझेदार होने के नाते उत्तरदायी हैं।
चेक पर हस्ताक्षर संबंधित आरोपी के हैं या नहीं — यह एक साक्ष्य का विषय है और इस स्तर पर इस पर निर्णय नहीं दिया जा सकता।
शिकायतकर्ता द्वारा समान प्रकृति के दो अन्य मामले दायर किए गए हैं, लेकिन उन मामलों में चेक नंबर और राशि अलग-अलग हैं, इसलिए उन्हें एक ही विवाद नहीं माना जा सकता।
अंतिम निर्णय:
अदालत ने यह मानते हुए कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, चेक बाउंस की शिकायत को खारिज करने की याचिका अस्वीकार कर दी। अब इस मामले में आगे सुनवाई होगी।
निष्कर्ष: माइनिंग एक्सप्लोसिव कंपनी को राहत देने से इंकार करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साझेदार होने के नाते अभियुक्त जवाबदेह हैं, और उनकी याचिका तकनीकी आधार पर टिक नहीं सकी।