Published On : Wed, Oct 25th, 2017

लाखों मासिक खर्च कर गैरजरूरी आईटी क्राफ्ट को पाल रही मनपा

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NMC Nagpur
नागपुर: नागपुर महानगरपालिका प्रशासन एक तरफ वाहवाही करते कल थक नहीं रह रही थी तो दूसरी तरफ अधिकांश नगरसेवकों के प्रस्तावों की निधि आभाव में रोके हुए है. और तो और मनपा में सक्षम विभाग के बावजूद सत्ताधारी दल की इच्छापूर्ति करते हुए उनसे अप्रत्यक्ष रूप से जुडी आईटी क्राफ्ट टेक्नोलॉजीज़ प्रायवेट लिमिटेड को मॉडर्न कम्युनिकेशन चैनल के नाम पर दर माह ३, ३३, १३२ रुपए भुगतान किया जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर ऊंगली उठा रही है. इसलिए शहर के जागरुक नागरिक मनपा पर नन्दलाल समिति जैसी जांच एजेंसी बैठाने की मांग की है.

ज्ञात हो कि मनपा में किसी के भी तीन लाख से अधिक के प्रस्तावों को मंज़ूरी नहीं दी जा रही है. जबकि स्थाई समिति अध्यक्ष के सभी प्रस्तावों, अधिकांश पर सिफारिश पत्र संलग्न है. अमूमन प्रस्ताव मनपा अतिरिक्त आयुक्त कार्यालय की शोभा बढ़ा रही है, कारण यह बताया जा रहा है कि निधि का आभाव है. और प्राप्त प्रस्ताव गैरजरूरी है. वहीं दूसरी ओर कुछ घाघ नगरसेवकों के ३ लाख से ऊपर के प्रस्ताव सत्तापक्ष के दिग्गजों की सहमति से मंजूरी भी दिए जाने का क्रम जारी है. फिर चाहे खेल-कूद हो या सांस्कृतिक आयोजन. ये घाघ नगरसेवक काम पहले, फिर प्रस्ताव तैयार कर उसे खुद हाथों-हाथ मंजूरी भी दिलवाने में भिड़े हैं.

दीपावली के पूर्व मनपा के पंजीकृत ठेकेदारों ने बकाया भुगतान को लेकर महापौर से मुलाक़ात की, जहां महापौर ने इनकी मांग को सिरे से नाकार दिया. फिर वे मनपायुक्त की अनुपस्थिति में मुख्य वित्त अधिकारी से मिले. उन्होंने सभी ठेकेदारों को दीपावली के नाम पर एक से तीन लाख रुपए का भुगतान करवाकर खुद की पीठ थपथपा ली.

उल्लेखनीय यह है कि मनपा में जनसंपर्क विभाग अस्तित्व में आज भी है. इसके साथ ही सत्तापक्ष ने अपने करीबी कंपनी मेसर्स आईटी क्राफ्ट टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड को मॉडर्न कम्युनिकेशन चैनल्स के प्रबंधन के नाम पर निजी जनसम्पर्क एजेंसी को ठेका दिलवाया। आज ठेकेदार कंपनी भी उतना ही काम कर रही है जो पहले मनपा के जनसम्पर्क विभाग द्वारा किया जाता था. मनपा प्रशासन मनपा जनसम्पर्क विभाग के कर्मियों को मासिक वेतन देने के साथ ही साथ उक्त आईटी क्राफ्ट को पिछले एक सालों से मासिक ३, ३३, १३२ रुपए का भुगतान कर रही है. टेंडर शर्तों के हिसाब से उनके कामों का एक साल पूरा होने पर अंकेक्षण के बाद प्रत्येक माह किए जा रहे भुगतान का १०% बढ़ा दिया जाएगा.

अमूमन आईटी क्राफ्ट मनपा के कार्यालयीन दिनों में रोजाना ४ से ५ समाचार संकलन करती है, वह भी मराठी में. अर्थात टेंडर शर्तों के हिसाब से आईटी क्राफ्ट मनपा को सेवाएं नहीं दे रही है. इस ठेकेदार के कामों की समीक्षा भी मनपा प्रशासन ने नहीं की है. सूत्र बतलाते हैं कि तय १०% निधि भी बढ़ा दी गई है. यह ठेकेदार चुनिंदा समाचार ही संकलन करने के साथ कुछ सत्तापक्ष के नगरसेवकों का समाचार संकलन करने में ही रुचि रखता है. जब आईटी क्राफ्ट कंपनी रोजाना ४-५ समाचार संकलन जैसी मात्र सेवाएं ही दे रही है तो मनपा का मूल जनसम्पर्क विभाग क्या बुरा था. मनपा प्रशासन को अपने कर्मियों-अधिकारियों पर भरोसा नहीं. उन्हें आज के दौर में सक्षम करने के बजाय वर्षों से कंसलटेंट रख बेफजूल खर्च करने की आदत सी हो गई है.

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सवाल यह है कि क्या मनपा प्रशासन इतना बौना हो गया जो सत्तापक्ष के गैरजरूरी कामों के साथ टेंडर शर्त पूरी न करने वालों को तरजीह दे रहा है. और शहर के विभिन्न कोने से चुनकर विभिन्न नगरसेवकों जायज मांगों को नज़रअंदाज किया जाना निंदनीय है. इतना ही नहीं मनपा की नई प्रशासकीय इमारत में मनपा जनसम्पर्क विभाग को जगह नहीं दी गई, जो मनपा का मुखौटा है. उसकी जगह ठेकेदार कंपनी को जगह दिया जाना सर्वत्र चर्चा का विषय बना हुआ हैं. अन्य ठेकेदार कंपनी भी जल्द मनपायुक्त से मुलाकात कर नई प्रशासकीय इमारत में कार्यालय हेतु कक्ष की मांग करेंगी अन्यथा आईटी क्राफ्ट पर की गई मेहरबानी का विरोध करेंगी.

शहर के जागरुक नागरिकों एवं सत्तापक्ष के नगरसेवक-नगरसेविकाओं ने मनपायुक्त से मांग की है कि या तो नगरसेवकों के प्रस्ताव, जो अतिरिक्त आयुक्त ने रोक रखे हैं, सभी को मंजूरी प्रदान करे या फिर गैरजरूरी ठेकेदार आईटी क्राफ्ट का टेंडर रद्द करे. साथ ही राज्य सरकार से मनपा में चल रही अनियमित्ताओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से एक बार पुनः नन्दलाल समिति जैसी अन्य समिति से जांच करवाने की मांग नगरसेवकों ने की है.

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