नागपुर: महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार द्वारा किया गया यह दावा कि नागपुर के MIHAN प्रोजेक्ट में 90 कंपनियां संचालित हैं और इससे 1.27 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, अब चर्चा का विषय बन गया है। इस दावे के बाद MIHAN से जुड़े वास्तविक आंकड़ों पर एक नजर डालना जरूरी हो गया है।
MIHAN (मल्टी-मोडल इंटरनेशनल कार्गो हब एंड एयरपोर्ट एट नागपुर) महाराष्ट्र की सबसे महत्वाकांक्षी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं में से एक है, जिसे विदर्भ क्षेत्र के लिए बड़े रोजगार केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रोजगार से जुड़े दावे काफी हद तक वास्तविकता के करीब हैं, लेकिन कितनी कंपनियां वास्तव में संचालन में हैं, इस पर तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है।
रोजगार के आंकड़े काफी हद तक सही
विभिन्न रिपोर्टों और आरटीआई के माध्यम से सामने आए आंकड़ों के अनुसार MIHAN प्रोजेक्ट के कारण लगभग 1.1 लाख से 1.2 लाख तक रोजगार उत्पन्न हुए हैं, जिनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की नौकरियां शामिल हैं।
इन आंकड़ों का मोटा-मोटी विभाजन इस प्रकार बताया जाता है:
- SEZ क्षेत्र में रोजगार: लगभग 78,000
- नॉन-SEZ क्षेत्र में रोजगार: लगभग 38,000
इस प्रकार कुल मिलाकर रोजगार का आंकड़ा करीब 1.16 लाख के आसपास बताया जाता है। ऐसे में यदि नए उद्योगों और सहायक रोजगार को शामिल किया जाए तो 1.27 लाख रोजगार का दावा पूरी तरह असंभव भी नहीं माना जा सकता।
90 कंपनियों के संचालन का दावा सवालों में
हालांकि, 90 कंपनियों के संचालन का दावा उपलब्ध औद्योगिक आंकड़ों से पूरी तरह मेल नहीं खाता।
MIHAN SEZ से जुड़ी जानकारी के अनुसार:
- SEZ क्षेत्र में लगभग 30 यूनिट्स ही वास्तव में संचालित हैं।
इसके अलावा पूरे MIHAN क्षेत्र (SEZ और नॉन-SEZ दोनों) में:
- लगभग 130 औद्योगिक प्लॉट आवंटित किए गए हैं।
- इनमें से करीब 50–55 प्लॉट ही फिलहाल संचालन में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बयानों में कई बार संचालित कंपनियों के साथ-साथ जमीन आवंटित की गई कंपनियां, निर्माणाधीन परियोजनाएं और प्रस्तावित इकाइयों को भी जोड़ दिया जाता है, जिससे कुल संख्या 80–90 के आसपास दिखाई देती है।
अभी भी आधे प्लॉट पूरी तरह सक्रिय नहीं
रिपोर्टों के अनुसार MIHAN परियोजना में आवंटित औद्योगिक प्लॉट्स में से लगभग आधे अभी भी पूरी तरह संचालन में नहीं आए हैं। कुछ मामलों में कंपनियों को समय पर परियोजना शुरू न करने के कारण जमीन आवंटन भी रद्द करना पड़ा है।
यही कारण है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
दो दशक पुरानी योजना, लक्ष्य अभी बाकी
MIHAN परियोजना की परिकल्पना 2000 के दशक की शुरुआत में की गई थी। इसका उद्देश्य नागपुर को लॉजिस्टिक्स, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना था। शुरुआती अनुमानों में इस परियोजना से एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद जताई गई थी।
करीब दो दशक बाद परियोजना ने उल्लेखनीय प्रगति जरूर की है, लेकिन अपने मूल लक्ष्यों तक पहुंचने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।
निष्कर्ष
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि:
- 1.27 लाख रोजगार का आंकड़ा व्यापक रूप से संभव है, खासकर यदि अप्रत्यक्ष रोजगार को शामिल किया जाए।
- लेकिन 90 कंपनियों के पूरी तरह संचालन में होने का दावा संभवतः उन कंपनियों को भी शामिल करता है जिन्हें जमीन आवंटित की गई है या जो अभी विकास के चरण में हैं।
जैसे-जैसे MIHAN में नए निवेश और उद्योग आते रहेंगे, आने वाले वर्षों में यह परियोजना नागपुर और पूरे विदर्भ क्षेत्र के लिए एक बड़ा औद्योगिक और रोजगार केंद्र बन सकती है।
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