Published On : Sun, Jan 29th, 2017

बर्डी के पुराने किताब बाजार पर मेट्रो रेल परियोजना की नजर

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Book Market Sitabuldi
नागपुर
: शहर के सत्तर साल पुराने किताब बाजार पर मेट्रो रेल परियोजना की नजर है। सीताबर्डी फ्लाईओवर के मुहाने पर डिप्टी डायरेक्टर (एजुकेशन) परिसर में स्थित इस किताब बाजार के अस्तित्व पर फिर एक बार संकट के बादल मंडरा रहे हैं, पहली बार तब मंडराए थे जब सीताबर्डी का फ्लाईओवर बनाया जा रहा था। हर तरह के शैक्षिक किताबों का ‘गढ़’ माने जाने वाले इस किताब बाजार की सिर्फ नागपुर जिले में ही नहीं छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के महाराष्ट्र से सटे जिले में भी अपार ख्याति है।

उल्लेखनीय है कि नागपुर मेट्रो रेल परियोजना का काम द्रुत गति से जारी है। दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर मेट्रो रेल नागपुर सीताबर्डी फ्लाईओवर से होकर गुजरेगी, तय है इस प्राचीन किताब बाजार वाले हिस्से को भी मेट्रो रेल परियोजना में समाहित किया जाएगा। नागपुर पुस्तक विक्रेता कल्याणकारी संस्था को इस संबंध में सूचित भी कर दिया गया है। संस्था पदाधिकारियों का कहना है कि वे शहर के विकास के खिलाफ नहीं हैं लेकिन प्रशासन को उनकी आजीविका के बारे में भी सोचना चाहिए। जब सीताबर्डी फ्लाईओवर बन रहा था तब तात्कालीन मनपा आयुक्त टी. चंद्रशेखर ने इस किताब बाजार को उजड़ने से बचा लिया था। संस्था के पदाधिकारियों ने अपनी समस्या से नागपुर के सांसद एवं केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी को भी परिचित कराया है। उन्होंने समाधान का आश्वासन है, मगर उन्हें डर है कि समाधान ढूँढ़ने में कहीं देर न हो जाए। हालाँकि अदालत ने नागपुर महानगर पालिका को इन किताब दुकानदारों के वैकल्पिक व्यवस्था का आदेश दिया है और मनपा ने भी इस बाबत अदालत को आश्वस्त दिया है, पर अभी तक जमीन पर कुछ भी होता नहीं दिखाई दे रहा है।

सीताबर्डी के इस सत्तर साल पुराने किताब बाजार में इस समय 28 दुकानें हैं और इस किताब बाजार के जरिये डेढ़ सौ ज्यादा लोगों को दो वक़्त की रोटी नसीब होती है। इस किताब बाजार की खासियत यही है कि यहाँ से आप इंजीनियरिंग, मेडिकल, बैंक, एनडीए, आईआईटी, नेट, सेट, यूपीएससी, एमपीएससी सहित प्रशासकीय एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की हर तरह की किताब खरीदी जा सकती है और काम होने पर उन्हें आधे दाम पर यहीं बेचा भी जा सकता है। हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी तीनों भाषाओं में किताबें यहाँ उपलब्ध हैं।

बर्डी का यह किताब बाजार सही मायनों में नागपुर शहर की धरोहर है, अब यह शहर पर निर्भर है कि वह अपने धरोहर की कद्र करते हुए उसे बचाने की पहल करता है, या फिर उसे मेट्रो रेल परियोजना की भेंट चढ़ते हुए चुपचाप देखता रह जाता है!

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