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    Published On : Wed, Nov 21st, 2018

    पद बचाने महापौर जाएंगी जनता के मध्य,दिखाएंगी सक्रियता,रिझाएंगी शीर्षस्थों को

    पालकमंत्री की घोषणा बाद महापौर जागी

    Nanda Jichkar

    नागपुर : विगत दिनों जिले के पालकमंत्री ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र अपने आका का चुनावी जंग में मार्ग प्रसस्त करने के उद्देश्य से सम्पूर्ण शहर में ज़ोन निहाय जनता दरबार लेने का निर्णय लिया,जिसकी घोषणा जिलाधिकारी ने की.इसके तुरंत बाद विवादों में घिरी व पदमुक्त होने के कगार पर खड़ी महापौर ने भी पालकमंत्री के पूर्व जनता के मध्य जाने जाने की घोषणा करवा कर नया पेंच खड़ा कर दिया।

    याद रहे कि महापौर पिछले २ वर्षो में सार्वजानिक कार्यक्रम और विदेश दौरे में लीं रही.परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार डिम्ट्स का सिक्योरिटी डिपॉजिस्ट कम कर और स्मार्ट सिटी के प्रमुख का आयुक्त का ढाई गुणा वेतन कर मनपा का आर्थिक नुकसान की.अपने सलाहकार,भ्राता,भतीजे के सिफारिशों पर चलते हुए महापौर निधि का बंटाधार किया।सभागृह में दिए निर्देशों और सभागृह में लिए निर्णयों का ‘फोलोअप’ न करने से सभागृह और महापौर पद का वजन कम किया।यहाँ तक कि पक्ष के दर्जनभर वरिष्ठ नगरसेवकों को दरकिनार निर्णय लेती रही.यहाँ तक कि महापौर कार्यालय को भाई-भतीजे,उनके करीबी के हवाले कार्यालय छोड़ उनके ग़ैरकृतों को शह दिया।

    पालकमंत्री की जनता दरबार के घोषणा बाद उसे असफल करने के उद्देश्य से महापौर का जनता दरबार उनकी कार्यकाल की असफलता की कहानी कह रही.अर्थात महापौर ने अपने कार्यकाल में जनता और शिष्टमंडल के मुद्दों को तहरिज न देने से मनपा में धीरे धीरे सन्नाटा छाने लगा.जब वरिष्ठों ने महापौर के कारनामें से छुब्ध होकर उसे बदलने का निर्णय लिया तो अब अचानक महापौर का जनता के मध्य जाना जनता की समझ से परे हैं,जबकि महापौर पद की गरिमा इतनी तगड़ी हैं कि सक्षमता से सम्पूर्ण शहर की प्रशासन को जनहित में निर्देश दे सकती हैं,जिसका पालन भी होना अनिवार्य हैं.

    पिछले लगभग २ वर्ष में महापौर द्वारा आमसभा में आलम यह रहा कि जो सत्तापक्ष नेता ने सिफारिश की,उसी का शब्द सह शब्द दोहराकर महापौर ने प्रशासन को निर्देश दिए.लगातार इस क्रम से प्रशासन भी जल्द समझ गया कि सत्तापक्ष में किसे तहरिज देना चाहिए।

    उल्लेखनीय यह हैं कि महापौर का जनता के मध्य जाने का कार्यक्रम महज एक दिखावा हैं,जो २७ नवंबर से शुरू होने जा रहा,इस मुहीम का भी निष्कर्ष शून्य ही रहने की संभावना नज़र आ रही हैं.


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