Published On : Mon, Oct 2nd, 2017

‘मटका किंग’ पंकज गंगर की गिरफ्तारी से दाऊद का हफ्ता हुआ कम, जानिए क्‍या है मटका धंधा

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मुंबई: हफ्ता वसूली मामले में पंकज गंगर की गिरफ्तारी के बाद आतंक का सिंडकेट चलाने वाले अंडरवर्ल्‍ड डॉन दाऊद इब्राहिम का वसूली का धंधा मंदा पड़ गया है। जी हां क्‍योंकि पंकज गंगर सट्टेबाजी मटका करोबार से जुड़ा था और डी कंपनी को हवाला के जरिए पैसा भेजता था। जबसे पंकज की गिरफ्तारी हुई है तबसे मटका कारोबार भी बंद हो गया है। जब तक मुंबई में यह धंधा चल रहा था तबतक दाऊद के खास गुर्गे छोटा शकील को हर महीने 50 लाख रुपए मिलते थे। लेकिन अब यह रकम 15 लाख रुपए प्रति महीने हो गई है।

कैसे डी कंपनी के गुंडों तक पहुंचता था पैसा
जानकारी के मुताबिक मटका कारोबारी पंकज गंगर हवाला के जरिये छोटा शकील को वूसली के पैसे भेजता था। फिर छोटा शकील से वह पैसा इकबाल कासकर के पास आता था और कासकर के मार्फत डी गैंग के गुंडों के पास पहुंचता था। बताया गया है कि गंगर का मटके का कारोबार गुजरात, राजस्थान और कोलकाता में अब भी चल रहा है। मुंबई में वह इमारतें बनाने के कारोबार से जुड़ गया था। पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि फिरौती की रकम को इकबाल ने मुंबई के बाहर दूसरे राज्यों में संपत्ति खरीदने और इमारत निर्माण के क्षेत्र में लगाया है।

क्‍या होता है मटका कारोबार
मटका कारोबार जुआ का ही एक अलग रूप है। दरअसल इस कारोबार में अमीरों को और अमीर बनाने का सपना दिखाकर उन्‍हें लॉट्री का टिकट बेचा जाता है। यह कारोबार बाकायदा सुनियोजित तरीके से चलता है। इसमें टिकट खरीदने के बाद मटका का नंबर लगता है और फिर वो नंबर टिकट से मैच हो जाने पर पैसे मिलते हैं। आप जानकर दंग रह जाएंगे कि मटका कैसे खेलना है, कैसे नंबर गेस करके ज्यादा पैसा बनाया जा सकता है, इसके लिए कुछ किताबें और गेस पेपर भी बाजार में मौजूद हैं।


नोटबंदी के बाद उजड़ गया मटका का कारोबार

सरकार द्वारा नोटबंदी के फैसले ने मटका बिजनस की दुकानें लगभग-लगभग पूरी तरह बंद कर दी हैं। नोटबंदी के साथ ही हवाला का बिजनस भी बंद हो गया है। बात अगर गुजरात की करें तो अहमदाबाद के 700 से 800 मटका काउंटर्स बंद हो गए हैं। एक आईपीएस अधिकारी ने बताया, ‘पहले हम रोज 10 से 12 केस मटका बिजनस से संबंधित दर्ज करते थे, लेकिन 8 नवंबर के बाद से एक भी शिकायत दर्ज नहीं की गई है। पूरे राज्य में मटका बिजनस बंद हो गया है।

खतरनाक है मटका का नशा
खेल का हिस्सा अधिकांश सामान्य वर्ग के लोग हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जो कि सारा काम धंधा छोड़कर इस खेल में लगे हुए हैं। पैसा नहीं रहने पर कई ने तो घर का जेवरात तक बेच दिया है। घर में भले ही खाने को पैसा न हो लेकिन मटका तो खेलना ही है। रातों रात पैसा कमाने के चक्कर में अधिकांश लोग अपना सबकुछ गंवा देते हैं।

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