Published On : Mon, Mar 1st, 2021

दो आचार्यों का मंगल मिलन

धर्मतीर्थ प्रणेता आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी और तपोभूमि प्रणेता भावी आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी का मंगल मिलन

नागपुर : आज रविवार 28 फरवरी को भावी आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी के आगमन पर आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी के पूरे संघ ने मंगल अगवानी की।धर्मतीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष आर्किटेक्ट चंद्रशेखर पाटनी, उपाध्यक्ष राजेन्द्र पाटनी, कोषाध्यक्ष गुलाबचंद कासलीवाल, मार्गदर्शक शरद जालनापुरकर , चंद्रशेखर पाटनी नेरी वाले सहित धर्मतीर्थ विकास समिति ने दोनों गुरूओं का पादप्रक्षालन किया और धर्मतीर्थ के आगामी पँचकल्याणक का श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। मंच संचालन आगम स्वरा गणिनी आर्यिकाश्री आस्थाश्री माताजी ने किया।माताजी ने कहा; आज धर्मतीर्थ में आचार्य श्री के दर्शन को प्रज्ञासागर आये हैं।वे अपने साथ प्रज्ञा की बहार लाये हैं।प्रज्ञायोगी और प्रज्ञासागर ने आनंद के फूल खिलायें हैं।ये संत सम्मेलन के बहाने सम्यग्दर्शन का उपहार लाये हैं।मुनि श्री प्रज्ञासागर जी ने कहा कि आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी ने जहाँ दीक्षायें देकर चैतन्य तीर्थों का नवनिर्माण किया ।

Gold Rate
May 09- 2026 - Time 10.30Hrs
Gold 24 KT ₹ 1,52,200 /-
Gold 22 KT ₹ 1,41,500 /-
Silver/Kg ₹ 2,58,800/-
Platinum ₹ 88,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

वहीं अंजनगिरी का उद्धार करते हुए संतों की साधना और समाधि के लिए धर्मतीर्थ का निर्माण कराकर समाज को स्थायी समाधान दिया है।आचार्य श्री गुप्तिनंदी ने कहा कि -संत मिलन को जाईये, तज माया अभिमान।ज्यों ज्यों पग आगे बढ़े, कोटि यज्ञ फल जान।। आज धर्मतीर्थ पर प्रज्ञा का सागर आया है जिसमें से वात्सल्य का अपार सागर उमड़ आया है।आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी ने कहा-जब भी मिलों तब दूध में मिश्री की तरह मिलो।छोटा सा मिश्री का टुकड़ा दूध में घुलमिलकर अपना छोटा सा आकार खो देता है।लेकिन पूरे दूध को ही मीठा कर देता है अर्थात मिलन से दोनों को ही लाभ होता है।लेकिन कभी भी दूध में नीबू की तरह नहीं मिलना।नीबू दूध में जाता है तो दूध को फाड देता है।लेकिन वह स्वयं भी अपनी अखंडता खो देता है।

अर्थात दूध को फाड़ने से पहले नीबू स्वयं कट जाता है।संतों के मिलन से धर्मतीर्थ महातीर्थ बन गया है।आचार्य श्री ने अपना साहित्य मुनि श्री को भेंट किया। दोनों संघों ने इच्छापूरक श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक देखा।इसके उपरांत आचार्य श्री ने नवजिन शांतिजिनालय की निर्माण सहित आदिनाथ गौशाला का अवलोकन कराया।सभी संतों ने उपस्थित गौवंश को णमोकार महामांगलिक पाठ सुनाया।संपूर्ण संघ की निरंतराय आहार चर्या संपन्न हुई।सभी ने आनंदयात्रा का लाभ लिया।शाम को मुनि श्री प्रज्ञासागर जी का मंगलविहार श्री जटवाड़ा क्षेत्र की ओर हुआ। कार्यक्रम की सफलता के लिए अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर पाटनी जी ने सभी का आभार व्यक्त किया। जूम मीटिंग के माध्यम से हजारों भक्तों ने इस महोत्सव का घर बैठे लाभ लिया।

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement