Published On : Sat, Sep 30th, 2017

विजयादशमी पर संघ के समारोह में आडवाणी की उपस्थिति से चर्चाओं का दौर शुरू


नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी उत्सव में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की उपस्थिति ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। वर्तमान बीजेपी के राजनीतिक परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर्वेसर्वा की भूमिका में है। संघ को जानने वाले जानकर भी मानते है की मोदी की मजबूती की एकमात्र वजह से उनके पीछे संघ का पूरी ताकत के साथ खड़ा होना ही है। हकीकत यह भी है की बीजेपी के ही कुछ नेता अब भी मोदी को और उनकी कार्यशैली को मन से नहीं अपना पा रहे है। पार्टी के भीतर ऐसे ही धड़े का नेतृत्व अघोषित तौर पर कभी बीजेपी में लौहपुरुष की भूमिका रखने वाले आडवाणी कर रहे है ऐसे कयास है।

सिर्फ पार्टी ही नहीं संघ के साथ के बाद भी संघ के भीतर ही स्वदेशी के रास्ते पर चलने वाले भारतीय मजदुर संघ ,भारतीय किसान संघ जैसे कुछ संगठन मोदी सरकार की नीतियों को लेकर सरकार से टकरा रहे है। विजयादशमी पर दिए गए संघप्रमुख डॉ मोहन भागवत के भाषण में डोकलाम और रोहिंग्या मुसलमानों पर दिए गए भाषण पर मीडिया में चर्चा के बीच सरकार को स्वदेशी अपनाने की दी गयी सीख को तवज्जो नहीं दी गयी। जबकि अपने भाषण में इस मुद्दे पर दिया गया उनका बयान सरकार को ताकीद की तरह है। वर्तमान दौर में सरकार जिस गति से विदेशी तकनीक को हाँथो -हाँथ ले रही है और इसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली का ख़ास रुझान रखना। संघ की संस्थाओं और सरकार के बीच टकराव का मुख्य कारण भी है। अपने भाषण में संघ प्रमुख ने एक तरह से संघ की नाराजगी से सरकार को अवगत भी करा दिया बल्कि दूसरी तरफ सरकार के कामकाज की तारीफ कर यह भी साफ़ कर दिया की काम सही दिशा में हो रहा है बस तरीके में बदलाव होना चाहिए।

इसी पृस्ठभूमि पर आडवाणी के संघ के कार्यक्रम में उपस्थिति और सरकार्यवाहक भैय्याजी जोशी से मुलाकात को भी देखा जाना चाहिए। संघ के साथ की वजह से प्रधानमंत्री मोदी से कोई असंतुष्ट टकराना नहीं चाहता इसलिए हमला वित्त मंत्री पर किया जा रहा है। दूसरी तरफ नाराज़ लोगो को कही जगह भी नहीं है। आडवाणी चाहते है की निति आयोग सरीखी पॉलिसी मेकिंग संस्थाओं में अन्य लोगो को जगह मिल जाये। यह काम संघ की दखल के बिना संभव नहीं। संघ चाहता है की पार्टी लाइन से अलग हटकर सरकार पर हमला बोलने वाले लोग शांत रहे। इन्ही सब बातों को ध्यान में रखकर आडवाणी और भैय्याजी के बीच बातचीत हुई होगी ऐसी संभावना है। संघ ऐसे माहौल में सरकार और पार्टी मे ब्रिज निर्माण की भूमिका निर्माण कर रहा है। जिसका असर आगामी दिनों में देखने को मिल सकता है। कार्यक्रम में पहुँचे वरिष्ठ स्वयंसेवक लालकृष्ण आडवाणी को पूरा सम्मान मिला। बाकायदा मंच में उनका नाम लेकर उनके कार्यो का उल्लेख किया गया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भैय्याजी जोशी खुद आडवाणी से मिलने उनके पास पहुँचे।