Published On : Wed, Jun 13th, 2018

अल्प भूधारक किसानों को रखा जा रहा योजनओं से वंचित

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नागपुर: राज्य सरकार ने अल्प भूधारक अर्थात एक हेक्टर से कम जमीन के मालिक किसानों को खेती करने में सहूलियतें प्रदान करने हेतु विभिन्न योजनाएं घोषित की.ताकि खेती के साथ इससे जुडी अन्य व्यवसाय कर अपना और अपने परिजनों का जीवनयापन कर सके.इस योजना का लाभ प्रत्येक गांव के खेतीहर और किसी कारण वश खेत जरूर गांव में हो लेकिन रह रहे शहर के आसपास,ऐसो को नहीं मिल रहा,वह भी पिछले साल-२ साल से.इस योजना के नियमों को तोड़मड़ोड़ कर ग्राम सचिव से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय स्थित मनरेगा विभाग मलाई खा रहा हैं.क्यूंकि जिलाधिकारी जिले में नए हैं इसलिए उन्हें इन योजनाओं से सम्बंधित २ वर्ष पुरानी जानकारी देकर गुमराह किया गया.जबकि हक़ीक़त में अल्प भूधारक खेतीहर योजनाओं से वंचित हैं.त्रस्त अल्प भूधारक खेतिहरों ने इस मामले में सूक्षम जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग जिलाधिकारी से की हैं.

सिंचन के लिए कुएं,जानवर रखने के लिए गोठा
अल्प भूधारक किसानों को उन्हें खेती करने के लिए कुएं निर्माण करने का खर्च ३ लाख रूपए देती हैं.इसके लिए अनिवार्य शर्त यह हैं कि आवेदक किसान की जमीन एक हेक्टर के भीतर होनी चाहिए।इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर पंचायत समिति के मार्फ़त जिलाधिकारी कार्यालय अंतर्गत मनरेगा विभाग तक पहुँचता हैं.यह प्रक्रिया अमूमन एक-डेढ़ माह की होनी चाहिए लेकिन आवेदकों को २-२ साल हो गए कोई लाभ नहीं मिला।अर्थात सालों साल नहीं मिल रहा.जरूरतानुसार पानी उपलब्ध न होने से किसान खेती के धंधे से दूर होते जा रहे और जो कर रहे वे वैसे फसल की खेती कर रहे जो अल्प पानी में भी किया जा सके.यह भी सत्य हैं कि खेती -किसानी पानी पर निर्भर हैं,जितना ज्यादा और अच्छा पानी उतना उन्नत किसान हो पाएगा। उसी तरह खेती में काम आने वाले जानवरों या खेती के साथ खेती से जुडी अन्य व्यवसाय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने जानवरों को रखने के लिए खेत परिसर में ७० हज़ार रूपए अनुदान देकर गोठा निर्माण करवाकर मदद कर रही.लेकिन यह योजना भी कागजों पर सही दर्शाई जाती और हक़ीक़त में सरासर उल्लंघन हो रहा हैं.

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योजना के लाभार्थी से मांग करते हैं कमीशन और काम का ठेका
उक्त दोनों सह अन्य योजनाओं का लाभ उठाने के इच्छुक आवेदकों से ग्रामसचिव या ग्राम पंचायत के पदाधिकारी ग्राम पंचायत में विषय मंजूरी करने से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक से मंजूरी दिलवाने का ठेका लेते हैं.इसके एवज में आवेदक को देखकर कीमत वसूली जाती हैं.इतना ही नहीं प्रस्ताव मंजूरी के बाद कुएं खुदाई का ठेकेदार भी वे ही तय करते हैं.ये ठेकेदार मनरेगा से किये गए कामों का भुगतान निकलवाने में माहिर बतलाये जाते हैं.आनाकानी करने वालों को नियमों के फेरहिस्त दर्शाकर उनका प्रस्ताव ख़ारिज करवा दिया जाता हैं.यहाँ तक की इटनगोटी और वाकी ग्राम पंचायत के सचिव का कहना हैं कि २ साल से मंजूर प्रस्तावों का काम शुरू नहीं हुआ.फ़िलहाल जो अल्प भूधारक गांव में रहते हैं और उन्होंने योजना का लाभ उठाने हेतु आवेदन किया हैं तो उनका प्रस्ताव ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार किया जा रहा.

इसकी फेरहिस्त ख़त्म होने के बाद गांव के बाहर रहने वाले अल्प भूधारक किसानों के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।जबकि बहुतेक अल्प भूधारक किसानों का प्रस्ताव अपने स्तर से तैयार कर मंजूरी दिलवा दी गई हैं.और सचमुच के लाभार्थी लाभ से वंचित हैं.कुछ पदाधिकारियों ने उक्त योजना का लाभ उठाते हुए जानवरों के रखने के नाम पर मिली निधि से अपने घर में कमरे बना लिए.ग्राम सचिव सह ग्राम पंचायत के पदाधिकारी साफ़ शब्दों में कहते फिर रहे शिकायत जिलाधिकारी से करो या फिर मंत्री से वे अल्प अवधि के लिए आते जाते रहते हैं.इतना नीचे तक जाँच-पड़ताल में उनकी कोई रूचि नहीं होती हैं,इसलिए उक्त योजनओं के मामले में भ्रस्टाचार दिनोदिन बढ़ते जा रहा हैं.

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