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    Published On : Fri, Oct 12th, 2018

    काम पर बल कम,अनशन पर ज्यादा

    नागपुर : नागपुर महानगरपालिका में काम करने का माहौल नहीं होने के कारण धीरे-धीरे एक-एक विभाग का निजीकरण किया जा रहा है. बावजूद इसके वर्तमान कर्मियों में सुधार आने के बजाय कुछ मुट्ठीभर तथाकथित नेता अपना उल्लू सीधा करने के उद्देश्य से आये दिन आंदोलन कर मनपा प्रशासन और शहर के नागरिकों को अड़चन में डालने का काम कर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से पुनः एक आंदोलन के लिए निम्न श्रेणी के कर्मियों पर दबाव बनाते देखा गया.

    आंदोलन का नेतृत्व मनपा राष्ट्रीय नागपुर कॉर्पोरेशन एम्प्लॉइज असोशिएशन कर रही है. मनपा में कुल कर्मचारियों के मुकाबले २५% भी इस असोशिएशन के सदस्य नहीं हैं. जब कभी उक्त असोशिएशन की ताक़त दिखाने या दबाव बनाने की योजना बनती है तब यह असोशिएशन सभी कामगारों पर दबाव बनाकर अपना उल्लू सीधा करती रही. इस आंदोलन के लिए उच्च पदों पर आसीन कर्मियों को एकजुट नहीं किया जा रहा. कुछ उन उच्च कर्मियों तक पहुंचे, तो उन्होंने असोशिएशन का सदस्य न होने का हवाला देकर जबरन करवाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान से खुद को किनारा कर लिया.

    पिछले ३ दिन से कामकाज के वक़्त आधा दर्जन आंदोलन के नेतृत्वकर्ता कर्मियों के रोजमर्रा के कामकाज में बाधा डाल हस्ताक्षर अभियान चलाये हुए हैं,इससे रोजमर्रा के कामकाज बाधित हो रहा है. उक्त जानकारी प्रशासन और पदाधिकारी को रहने के बाद भी उनकी चुप्पी समझ से परे है. जबकि मनपा इन दिनों भीषण कड़की के दौर से गुजर रही है. किसी भी विभाग में सुबह १० से शाम ५ के बीच आधे दिन कर्मचारी अपने कक्ष में दिखते ही नहीं. पता करने पर जवाब मिलता है कि किसी कार्यालयीन काम से बाहर गए हैं.

    इसमें से अधिकांश कैंटीन, पान ठेलों सह अन्य जगह एकत्रित होकर गप्पे हांकते नज़र आ जाएंगे. इसलिए पिछले कुछ वर्षो से मनपा का एक एक विभाग का निजीकरण का क्रम जारी है और जो कर्मी काम में लीन हैं, ऐसे गिने चुने ही हैं, उन पर काम पर काम लादे जाने का सिलसिला भी जारी है. जब कभी ऐसे कर्मठ कर्मी किसी कारणवश अवकाश पर चले जाते हैं, तो उस विभाग का काम ठप्प पड़ जाता है.

    संगठन के पास प्रशासन और सरकार से प्रलंबित मांगों की लम्बी-चौड़ी फेरहिस्त है. लेकिन इनके पास कामगारों के रोजमर्रा के कामकाज का ‘सोशल ऑडिट’ रिपोर्ट नहीं है. प्रशासन को सबसे पहले सभी कर्मियों को उनके-उनके मूल विभाग भेजना चाहिए, साथ ही जो कर्मी एक पद या विभाग में वर्षों से कुंडली मार बैठा है, उनका तबादला करना चाहिए.

    उल्लेखनीय यह है कि २० अक्टूबर तक हस्ताक्षर अभियान के बाद आंदोलन,अनशन की तिथि घोषित की जाएंगी.

    जनसम्पर्क विभाग मनपा प्रशासन से कर रहा खिलाफत
    जनसम्पर्क विभाग का मूल काम है मनपा के सम्पूर्ण विभाग के सकारात्मक कामकाज का प्रचार-प्रसार करना. यह तब मुमकिन होगा जब मनपा जनसम्पर्क विभाग को मूल जनसम्पर्क अधिकारी मिलेगा. लेकिन प्रभारी मनपा जनसम्पर्क अधिकारी इन दिनों पिछले ३ दिन से मनपा प्रशासन और पदाधिकारियों के खिलाफ रोजाना हो-हंगामा करने वाले ठेकेदारों का साथ दे रहे हैं.

    वे उनकी खबर सह छायाचित्र मीडिया को मेल व व्हाट्सप्प के माध्यम से भेज मनपा की बदनामी करने की भूमिका निभा रहे हैं. इस मामले में जल्द ही विपक्ष नेता प्रशासन से पत्र व्यवहार कर कानूनन कार्रवाई की मांग करेंगे. अब देखना यह है कि विपक्ष नेता किस करवट लेते हैं.

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