Published On : Tue, Mar 20th, 2018

डिजिटल हुआ कुरान का ज्ञान

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Digital Quran
जयपुर: इस्लाम भी डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन गया है। बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक व अभिनेता सरोश खान ने देश की पहली डिजिटल कुरान तैयार करवाई है जिससे कोई भी व्यक्ति इस पवित्र पुस्तक को अपनी भाषा में पढ़-समझ सकता है। मंगलवार को जयपुर में उन्होंने इसकी प्रति ऑल इंडिया दारूल कजाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राजस्थान के चीफ काजी खालिद उस्मानी और राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर शास्त्री कोसलेंद्रदास को भेंट की।

सरोश खान ने बताया कि डिजिटल कुरान को प्रदेश के युवाओं, मुस्लिम स्कॉलर्स व धर्माचार्यों को नि:शुल्क भेंट की जाएगी। इसके लिए जुलाई में जयपुर में एक बड़ा धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज इस्लाम संकट के दौर से गुजर रहा है। इसका प्रमुख कारण मुसलमानों का इस्लाम की तालीम से दूर होना है। इसका फायदा कट्टरपंथी लोग उठाते हैं और युवाओं को भ्रमित करते हैं।

प्रोजेक्ट हेड अविनाश सिंह ने बताया कि खान ने एक चीनी कंपनी से करार कर भारतीय भाषाओं के मुताबिक डिजिटल कुरान तैयार करवाई है। इसमें उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी के अलावा संस्कृत, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, तमिल, मलयालम, बंगाली और तेलुगु जैसी 13 भारतीय भाषाओं का विकल्प है। इसका उपयोग बेहद आसान है। व्यक्ति को कुरान की जिस भी आयत को पढऩा है उस पर ई-पेन से टच कर अर्थ के लिए भाषा का चुनाव करना है। व्यक्ति को स्वत: ही उसकी आसान भाषा में व्याख्या सुनाई देगी।

अलगाव से दूर होंगे मुस्लिम
इस अवसर पर चीफ काजी खालिद उस्मानी ने कहा कि जैसे-जैसे मुसलमान कुरान की तामील से दूर होते जा रहा है वैसे-वैसे वह दीन और दुनिया, दोनों से दूर होता जा रहा है। जो व्यक्ति कुरान को सही अर्थों में पढ़-समझ लेता है वह किसी भी सूरत में हिंसा और आतंकवाद की पैरवी नहीं कर सकता। जो व्यक्ति कुरान को अपने जीवन में उतार लेता है उसके लिए पैगंबर साहब आदर्श होते हैं न कि कोई आतंकवादी अथवा उन्मादी। उन्होंने कहा कि कुरान की सच्ची तामील तरक्की की तामील है जहां हिंसा और कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। कुरान राष्ट्र से अलगाव की नहीं, बल्कि राष्ट्र से प्रेम की शिक्षा देती है।

दूर होंगी कई भ्रांतियां
इस मौके पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य शास्त्री कोसलेंद्रदास ने कहा कि दूसरे धर्मों के लोगों में इस्लाम को लेकर कई भ्रांतियां हैं। इसकी वजह कुरान का अध्ययन नहीं करना है। बाकी धर्म ग्रंथों की तरह कुरान भी यह सिखाती है कि धर्म साधना की अपेक्षा रखता है। धर्म के साधक को राग-द्वेषरहित होना होता है। धार्मिक चित्त प्राणिमात्र की पीड़ा से द्रवित होता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल कुरान से अरबी भाषा के अलावा दूसरी भाषाओं की जानकारी रखने वाले भी इस्लाम के सही स्वरूप को समझ सकेंगे। इससे वे सब भ्रांतियां दूर होंगी जो समाज में बेवजह तनाव फैला रही हैं।

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