Published On : Wed, Jan 15th, 2020

अपने मन में रामनाम के मणि दीपक को रखेंः पं. आशीष मिश्र

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strong>नागपुर: गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि यदि मानव भीतर व बाहर दोनों ओर उजाला चाहता है, तो मुख रूपी द्वार की जीभ रूपी देहली पर व अपने मन में रामनाम रूपी मणि दीपक को रखंे. उक्त उद्गार अखंड भारत विचार मंच की ओर से आयोजित श्री रामकथा में काशी के कथावाचक पंडित आशीष मिश्र ने भक्तों से कथा के अंतिम दिवस व्यक्त किए. श्री राम कथा का आयोजन मानकापुर प्राचीन शिव मंदिर प्रांगण में किया गया था.

महाराजश्री ने आगे कहा कि श्री राम का नाम नृसिंह भगवान है, कलियुग हिरण्यकश्यपु है और जप करनेवाले जन प्रल्हाद के समान हैं. यह राम का नाम देवताओं के शत्रु को मारकर जप करने वालों की रक्षा करेगा. सगुण स्न के ध्यान में तो प्रीति युक्त रुचि नहीं है और निर्गुण स्वरूप मन से दूर है.

तुलसीदास जी कहते हैं कि ऐसी दशा में रामनाम स्मरण रूपी संजीवनी बूटी का सदा सेवक करना चाहिए. जो श्री राम नाम का सहारा लिए बिना ही परमार्थ की, मोक्ष की आशा करता है वह तो मानो बरसते हुए बादल की बूंद पकड़कर आकाश में चढ़ना चाहता है. गोस्वामी जी कहते हैं कि हे मन, तू संसार के सब पदार्थों से प्रीति तोड़कर श्री राम से प्रेम कर.

आज कथा विराम के पश्चात महाप्रसाद का भव्य आयोजन किया गया. महाप्रसाद का लाभ असंख्य भक्तों ने उठाया. आज व्यासपीठ का पूजन यजमान मनोज कुमार सिंह परिवार सहित संस्था के सभी सदस्यों ने किया. सफलतार्थ सभी कार्यकर्ता प्रयासरत थे.

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