मुंबई : पिछले साल के अंत में हुए कमला मिल अग्निकांड में उच्चतम न्यायालय ने मिल में स्थित मोजो बिस्ट्रो रेस्त्रां के सह-मालिक युग टुली को जमानत देने से मना कर दिया है। इस अग्निकांड में 14 लोगों की मौत हो गई थी और कई झुलस गए थे। लेकिन कोर्ट ने इस 28 वर्षीय कारोबारी को तीन महीनों के बाद निचली अदालत में जमानत पाने के लिए फिर से याचिका दायर करने को कहा है।
न्यायाधीश एल नागेश्वर राव और न्यायाधीश एमएम शांतनागोदर ने टुली की याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में टुली ने मुंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उच्च न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने टुली की पैरवी करते हुए कहा कि ‘इस हादसे में उनके मुवक्किल की कोई भूमिका नहीं बनती, क्योंकि यहां जो आग लगी वह पास के ही रेस्त्रां वन अबव के स्टाफ की लापरवाही से लगी और इस कारण आग फैल गई।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील निशांत कांतेश्वर ने टुली की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यदि उसे जमानत दे दी गई तो वह जांच कार्य को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना था कि इस पूरे कांड में टुली की भूमिका लापरवाही की रही है।
गौरतलब है कि 1 मई को भी उच्चतम न्यायालय ने टुली की अंतरिम जमानत की याचिका को नामंजूर कर दिया था। बाद में उसे मुंबई उच्च न्यायालय में उठाया गया। उच्च न्यायालय ने भी इसे 27 अप्रैल को खारिज कर दिया था। इस अग्निकांड में मोजो बिस्ट्रो, वन अबव और बीएमसी के अधिकारियों को आरोपी ठहराया गया है।
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