Published On : Fri, Mar 6th, 2020

दुर्बल घटक समिति अंतर्गत कामकाज रोकने से उग्र हुआ सत्तापक्ष

Advertisement

– पत्रपरिषद में पक्षनेता जाधव व वरिष्ठ नगरसेवक तिवारी ने कहा,हम तैयार कर रहे आयुक्त मूढ़े के गैरकृतों की सूची

नागपुर – मनपा में सत्तापक्ष नेता संदीप जाधव व पूर्व सत्तापक्ष नेता दयाशंकर तिवारी ने संयुक्त पत्रपरिषद लेकर आयुक्त तुकाराम मूढ़े द्वारा दुर्बल घटक समिति द्वारा अतिमहत्वपूर्ण कामकाजों के लिए वितरित निधि से मंजूर/निविदा प्रक्रिया पूर्ण/कार्यादेश जारी होने के बाद काम शुरू न होने वाले कार्यों को निधि आभाव दर्शा कर रोक दिया जाना निंदनीय हैं।जबकि नियमानुसार ऐसे विशेष क्षेत्र के कामकाज रोका नहीं जा सकता और निधि बच गई तो अगले आर्थिक बजट में इसी मद में जोड़ दिया जाता हैं।

समाज विशेष के लिए प्रत्येक वर्ष के प्रस्तावित आर्थिक बजट का 5% राशि दुर्बल घटक समिति के माध्यम से दलित बस्ती आदि के अतिमहत्वपूर्ण कामकाजों को इसी माध्यम से पूर्ण किया जाता रहा। 38 दिन पूर्व नागपुर मनपा के नए आयुक्त मूढ़े ने कार्यभार संभाला और सभी मदो के कार्यादेश जारी न होने वाले और सिर्फ टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने वाले सभी कामकाजों के प्रस्तावों को आगे की कार्रवाई करने पर रोक लगा दी,इस क्रम में दुर्बल घटक समिति से संबंधित लगभग 30 करोड़ के कामकाज रोकें गए।

तिवारी ने झल्लाते हुए कहा कि हम आयुक्त मूढ़े द्वारा किये जा रहे नियम के विरुद्ध कार्यों की सूची तैयार कर रहे,फिर कानूनी सलाह लेकर दलित विरोधी कार्यशैली के लिए संविधान में प्रावधान नियमों के आधार पर पहल करेंगे।

Advertisement

एक सवाल के जवाब में तिवारी ने जानकारी दी कि दुर्बल घटक समिति से संबंधित प्रस्तावों पर लगभग 34 हस्ताक्षर होते हैं, जिसे परिक्रमा करवाने में डेढ़-2 माह का समय लगता हैं। वर्ष 2019-20 का बजट जून में पेश किया गया। अगस्त के शुरुआत तक दुर्बल घटक समिति सदस्यों का चुनाव फिर सभापति के चुनाव प्रक्रिया हुई। सभापति गोपीचंद कुमरे ने दुर्बल घटक के लिए आरक्षित 56 करोड़ की निधि काफी पहले वितरित कर दी। लेकिन शेष प्रक्रिया पूर्ण होने में देरी हुई,इसलिए कुछ के टेंडर तो कुछ के कार्यादेश जारी हुए।लेकिन कामकाज शुरू नहीं हो पाई।
सवाल कुछ और जवाब कुछ

पिछली आमसभा में आयुक्त से पूर्व के 12 वर्षों के बजट का ‘कैरी फारवर्ड’ का हिसाब मांगा गया,आयुक्त ने एक माह का समय मांगा तो महापौर ने आयुक्त द्वारा कार्यादेश जारी होने के बाद रोके गए कामों को शुरू करने का निर्देश प्रशासन को दिया था। विगत दिनों महापौर ने आयुक्त से उनके द्वारा दिये गए निर्देश के अमलीकरण की रिपोर्ट मांगी तो आयुक्त ने जवाब दिया कि रिवाइज बजट के बाद रोके गए कामकाजों को शुरू करने संबंधी निर्णय देंगे। अर्थात महापौर ने पूछा क्या और उन्हें आयुक्त द्वारा जवाब कुछ दिया जाना समझ से परे हैं।
मोना ठाकुर पर आयुक्त अडिग

आमसभा में बतौर सीएफओ दोबारा मोना ठाकुर की नियुक्ति गैरकानूनी ठहराते हुए महापौर ने उसे वापिस भेजने का निर्देश दिया था लेकिन आयुक्त ने एक न सुनी,जब महापौर जोशी ने पत्र व्यवहार का जवाब मांगा तो आयुक्त ने बताया कि मनपा में सीएफओ पद रिक्त हैं, अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर मोना ठाकुर को प्रभार दिया गया। रिवाइज बजट व प्रस्तावित बजट का कामकाज शुरू हैं, इसलिए फिलहाल सरकार द्वारा अगला पर्यायी व्यवस्था होने तक ठाकुर को कायम रखा जायेगा। तो तिवारी का कहना था कि इससे पहले भी ऐसी स्थिति में अतिरिक्त उपायुक्त स्तर के अधिकारी सीएफओ की जिम्मेदारी मनपा में संभालते रहे। क्योंकि ठाकुर मनपा की ऑडिटर भी हैं और सीएफओ भी। दोनों पदों के साथ न्याय नहीं कर पाने का अंदेशा तिवारी ने व्यक्त किया।

आयुक्त के रवैय्ये से आज भी पूर्व सभापति नासुप्र विश्वस्त नए स्थाई समिति सभापति के चुनाव सम्पन्न होने के बाद आयुक्त को पत्र लिखा गया कि पूर्व सभापति का बतौर नासुप्र विश्वस्त कार्यकाल भी समाप्त हो चुका हैं, इसलिए नए सभापति को अगले नासुप्र विश्वस्त बनाने संबंधी प्रन्यास को पत्र भेजें तो आयुक्त ने उसमें त्रुटि निकाली कि इस संदर्भ में सरकार नोटिफिकेशन जारी करने के बाद वे पत्र देंगे। जबकि मनपा आयुक्त और सभापति के लिए सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी करने का कोई नियम नहीं हैं। अगर ऐसा हैं तो वे खुद कैसे नासुप्र बजट के वक़्त बतौर विश्वस्त कैसे उपस्थित हुए ,यह सवाल भी तिवारी ने प्रमुखता से उठाई।अर्थात मनपा के पूर्व स्थाई समिति सभापति आज भी नासुप्र के विश्वस्त पद पर कायम हैं !

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Follow Nagpur Today on Google
Add Nagpur Today to your Preferred Sources on Google to see our latest news more prominently in Search.