Published On : Wed, Aug 18th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

क्या मेसर्स अश्विनी इंफ़्रा-डीसी ग़ुरबक्षाणी को आयुक्त संरक्षण दे रहे ?

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– अगर हाँ तो सर्वत्र यही उम्मीद की जा रही,नहीं तो कार्रवाई में देरी क्यों ?

नागपुर – नागपुर महानगरपालिका में वर्ष 2015-16 के दरम्यान बहुचर्चित सीमेंट सड़क निर्माण शुरू हुआ,इस बिना पर कि डामरीकरण सड़कों के निर्माण में सालों से प्रत्येक वर्ष बड़े पैमाने में धांधली हो रही थी,जिसे रोकने के लिए सीमेंट सड़कों का जाल बिछा देने से भ्रष्टाचार तो रुकेगा साथ में व्यर्थ खर्च भी थम जाएगा।लेकिन हुआ उल्टा तत्कालीन मनपायुक्त,अतिरिक्त आयुक्त,मुख्य अभियंता,मुख्य लेखा व वित्त अधिकारी,अधीक्षक अभियंता,कार्यकारी अभियंता,उप अभियंता,ऑडिटर,प्रकल्प सलाहकार सह स्थाई समिति के मिलीभगत से फेज-2 अंतर्गत टेंडर सह भुगतान घोटाला को सफल अंजाम दिया गया.सितम्बर 2020 में NAGPUR TODAY/RTI कार्यकर्ता ने उक्त घोटाले का पर्दाफाश किया।जिसमें अहम् भूमिका वर्त्तमान अधीक्षक अभियंता (जलापूर्ति) मनोज तालेवार व नगर रचना विभाग के उप अभियंता मंगेश गेडाम ने निभाई।

उक्त प्रकरण के सार्वजानिक हुए 9 माह से अधिक हो चुके है,इतने समय में तो ‘नया जीवन जमीं पर आ जाता है’.

इस प्रकरण के दोषी और दोष सार्वजानिक हो चूका है,बावजूद इसके मनपायुक्त को ठोस निर्णय लेने में लग रही देरी,कई सवाल खड़े कर रहे.जैसे क्या मेसर्स अश्विनी इंफ़्रा-डीसी ग़ुरबक्षाणी को आयुक्त संरक्षण दे रहे ? या फिर अगर हाँ तो सर्वत्र यही उम्मीद की जा रही,नहीं तो कार्रवाई में देरी क्यों ?

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CE की भूमिका
याद रहे कि आयुक्त ने भारी दबाव में एक विवादास्पद अधिकारियों की जाँच समिति गठित की थी,जिसमें अधिकांश अधिकारी अक्सर विवादों में नज़र आते थे,इस समिति का नेतृत्व मनपा की प्रभारी विवादास्पद मुख्य अभियंता लेना नेतृत्व कर रही थी.क्यूंकि जाँच उनके मुंहबोले भ्राता ग़ुरबक्षाणी की हो रही थी,इसलिए आजतक मुख्य अभियंता जाँच में आंच डालती नज़र आ रही.इस चक्कर में CE ने अधिकारी-पदाधिकारी-ठेकेदार कंपनी से अबतक समन्वय साधती नज़र आई.एक-दूसरे की मदद मिले इसलिए ठेकेदार कंपनी से अन्यों को मुँह-मांगी मदद भी करवाती रही.इन लाभार्थियों में वर्त्तमान पदाधिकारीगण भी शामिल है.इन सब के बावजूद CE को संतोषजनक न सहयोग मिला और न ही मामला ठंडे बस्ते में गया.

दूसरी ओर जाँच समिति के सदस्यों से भी मनमाफिक बोगस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर तो ले ली लेकिन आयुक्त के COMMENT कि ‘मामले का दोषी तय करो’ से CE हड़बड़ा गई.

जागरूक नागरिकों का मानना है कि
पिछले 2 वर्ष से मनपा के संपत्ति कर छोटे-छोटे बकायेदारों,छोटी-छोटी अतिक्रमणकारियों के सामान/संपत्ति जप्त की मुहीम शुरू है,बाद में जप्त सम्पत्तियों की निलामी तक की जा रही.दूसरी ओर बोगस टेंडर सह भुगतान के लाभार्थी अधिकारी वर्ग और ठेकेदार कंपनी को पिछले 9 माह से बचाया जा रहा.क्या मनपायुक्त गरीब विरोधी है या फिर घोटालेबाजों के समर्थक,गर हाँ तो निंदनीय है.

मनपा ठेकेदारों का कहना कि
मनपा के लोकल ठेकेदारों को उनके छोटे-छोटे कामों में खोट निकालने वाली PWD विभाग,ठेकेदार पंजीयन में पैसे खाने वाली,तड़पा-तड़पा कर भुगतान करने वाली मनपा प्रशासन दोहरी नित अपना रही.मनपा और ठेकेदारों का नाम ख़राब करने वाली मेसर्स अश्विनी इंफ़्रा-डीसी ग़ुरबक्षाणी पर आयुक्त अविलम्ब कार्रवाई करते हुए शेष भुगतान रोक आजीवन काली सूची में डाल दे,साथ में फेज-3 का भी भुगतान सह SD को भी रोक दे.इतना ही नहीं इस घोटाले में दोषी अधिकारियों व वर्त्तमान में संरक्षण देने वाले CE व अन्यों पर भी बड़ी कार्रवाई करें,गर न्याय करने की नियत हो तो……

मुंडे भक्त अधिकारी
जाँच समिति और उससे ऊपर एक आला अधिकारी आये दिन खुद को मुंडे भक्त कहने से बाज़ नहीं आते,नागपुर मनपा में वे प्रत्येक कामकाज सह सलाह मुंडे से लेते है.इस मामले में भी मुंडे से सलाह ली गई,क्यूंकि मुंडे थे भ्रष्ट इसलिए बड़ी भ्रष्टाचार की खबर मिल रही,इसलिए जाँच उपरांत कार्रवाई में देरी कर समय काटा जा रहा.

प्रमुख दोषी अधिकारी ने खर्च किये
PWD के तत्कालीन EE,कुछ माह पहले तक SE रहे इस दोषी अधिकारी ने उपजे मामले को शांत करने के लिए जेब से या फिर किसी के जेब से 20 लाख खर्च कर चुके लेकिन आजतक सकते में है.वर्त्तमान SE भी ठेकेदार कंपनी DC GURBAXANI के हमखास है और इसी वर्ष उनका सेवानिवृति भी है,इसके बाद पुनः SE,PWD बनने के लिए मनोज तालेवार फील्डिंग लगाए हुए है,इनके आका सत्ताधारी है,इनका और 7 साल का कार्यकाल शेष है,इनके समर्थक को मुंडे ने ऐसा खदेड़ा कि आजतक उसी लाभ के पद पर लौट नहीं सके,जबकि जीतोड़ कोशिशें कर रहे है.

शिकायतकर्ता ने रिपोर्ट पर दिया जवाब
आयुक्त के निर्देश पर CE के नेतृत्व वाली समिति ने बोगस रिपोर्ट तैयार कर DC GURBAXANI को बचाने की कोशिश की.जिसका अध्ययन कर उनके रिपोर्ट की खामियां गिनवाते हुए तर्क सांगत जवाब दिए,जिसे पढ़कर CE और SE स्तब्ध हो गए.इन्होने पूर्व स्थाई समिति सभापति का जेब गर्म कर मामला ठंडा करने की कोशिश की लेकिन जेब गर्म होते ही उक्त सभापति मूक प्रदर्शन कर शिकायतकर्ता के पक्ष में खड़े नज़र आ रहे.

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