Published On : Wed, Apr 22nd, 2015

क्या संघ के तप को कृष्णगोपाल भ्रष्टाचार आरोपी हरि गौतम को बढ़ाने में गंवा रहे है ?

सत्ता के गलियारे से – – कृष्णमोहन सिंह

चर्चा है कि डा.कृष्णगोपाल शर्मा ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उस कमेटी का प्रमुख बनवाया जिसने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को सुधारने के बहाने उसे खत्म करके कुछ – कुछ योजना आयोग का ऊपरी चोला बदल कर नीति आयोग जैसा बनाने की रिपोर्ट दी है। यह हरि गौतम एक महिला भाजपा नेता शीला गौतम व डा. मुरली मनोहर जोशी के यहां जुगाड़ लगाकर काशी हिन्दू वि.वि. ( बीएचयू) के कुलपति बन गये थे।

वहां उन्होंने जो धतकरम किया था उसके चलते छात्रों ने उनके विरूद्ध आंदोलन शुरू कर दिया था। उसके बावजूद उनको दूसरा टर्म दिया जा रहा था। लेकिन तबके सपा सांसद मोहन सिंह व ओम प्रकाश ने इस मामले को संसद में उठाया, तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर.नारायणन से मुलाकात किया , जिसके बाद नारायण ने गौतम को दूसरा टर्म दिये जाने वाली फाइल को वापस लौटा दिया। उसके बाद मोहन सिंह व ओमप्रकाश ने तबके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई से मुलाकात करके सारी बात बताकर , प्रमाण देकर हरि गौतम को बीएचयू में टूसरा टर्म नहीं दिये जाने की फरियाद किया।

जिसके बाद वाजपेई ने डा. जोशी से कहा कि इस आदमी को आप क्यों बीएचयू का फिर कुलपति बनाने पर आमादा हैं। इसे हटाइये। कहा जाता है उसके बाद शीला गौतम आदि ने लाबिंग करके हरिगौतम को यूजीसी का अध्यक्ष बनवा दिया था। यह भी कहा जाता है कि तब हरि गौतम ने डा. जोशी ,शीला आदि के पैर छू-छू कर यूजीसी अध्यक्ष बने थे। यूजीसी अध्यक्ष रहने के दौरान हरिगौतम ने क्या – क्या धतकर्म किये ,उस समय यूजीसी में क्या –क्या भ्रष्टाचार हुए , कैसे सिफारिश पर नियुक्तियां हुईं , इस पर कैग ने मोटी रिपोर्ट दी है। अब सवाल यह उठने लगा है कि जिस हरि गौतम पर यूजीसी अध्यक्ष रहते भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। बाकायदा कैग की रिपोर्ट में यह है।

उस हरि गौतम को कैसे यूजीसी को सुधारने के लिए बनाई कमेटी का प्रमुख बना दिया गया , और कैसे हरि गौतम ने बीएचयू का कुलपति रहने के दौरान वहां ला फैकल्टी में रहे यसमैन जरिवाला को अपनी इस कमेटी में सदस्य बना या बनवा लिया ?कहा जाता है कि कृष्णगोपाल की सिफारिश पर स्मृति मल्होत्रा जुबिन ईरानी ने हरि गौतम को इस कमेटी का प्रमुख बनाया।

इसके चलते लोग कहने लगे हैं कि संघ के तप का उपयोग यदि कृष्णगोपाल या उनके जैसे पदाधिकारी इसी तरह अपने चहेते रैकेटियर भ्रष्टाचार आरोपियों को शिक्षा या अन्य क्षेत्र में बढ़ाने में करते रहे तो संघ की साख पर बट्टा लगता जायेगा।