Published On : Sun, Mar 25th, 2018

पीएमओ से न्यूज़ रूम में फोन पर निर्देश आते हैं कि क्या खबर बनानी है- पुण्य प्रसून वाजपेयी

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जाने माने पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने आज कहा कि मोदी सरकार आने के बाद देश में पत्रकारिता के हालात बदल गए हैं. अब संपादक को पता नहीं होता कि कब फोन आ जाए। उन्होंने साफ कहा कि कभी पीएमओ तो कभी किसी मंत्रालय से सीधे फोन आता है. इन फोन कॉल्स मे खबरों को लेकर आदेश होते हैं।

पुण्य प्रसून बाजपेयी पत्रकार आलोक तोमर की स्मृति में आयोजित व्याख्यायान में बोल रहे थे व्याख्यायान का विषय था सत्यातीत पत्रकारिता : भारतीय संदर्भ.

पुण्य प्रसून ने कहा कि मीडिया पर सरकारों का दबाव पहले भी रहा है लेकिन पहले एडवाइजरी आया करती थी कि इस खबर को न दिखाया जाए. या इस दंगे से तनाव फैल सकता है. अब सीधे फोन आता है कि इस खबर को हटा लीजिए. प्रसून ने कहा कि जब तक संपादक के नाम से चैनलों को लायसेंस नहीं मिलेंगे. जब तक पत्रकार को अखबार का मालिक बनाने की अनिवार्यता नहीं होगी, तबतक कॉर्पोरेट दबाव बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि खुद उनके पास प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आते हैं और अधिकारी बाकायदा पूछते हैं कि अमुक खबर कहां से आई ? ये अफसर धड़ल्ले से सूचनाओं और आंकड़ों का स्रोत पूछते हैं. प्रसून ने कहा कि अक्सर सरकार की वेबसाइट पर आंकड़े होते हैं लेकिन सरकार को ही नहीं पता होता.

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वाजपेयी ने कहा कि राजनैतिक पार्टियों के काले धंधे में बाबा भी शामिल हैं. बाबा टैक्सफ्री चंदा लेकर नेताओं को पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि जल्द ही वो इसका खुलासा स्क्रीन पर करेंगे.

कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में राजदीप सरदेसाई भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में झूठ की मिलावट बढ गई है. किसी के पास भी सूचना या जानकारी को झानने और परखने की फुरसत नहीं है. गलत जानकारियां मीडिया मे खबर बन जाती हैं.

उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉर्पोरेट असर और टीआरपी के प्रेशर को दोष देने से पहले पत्रकारों को अपने गरेबां मे झांककर देखना चाहिए. हम कितनी ईमानदारी से सच को लेकर सजग हैं.

सेमिनार में पत्रकार राम बहादुर राय भी आए थे . उन्होंने मीडिया आयोग बनाने की मांग की. राम बहादुर राय ने कहा कि उनके पास सूचना है कि किस तरह मीडिया पर कुछ लोगों का एकाधिकार हो रहा है.

पत्रकार उर्मिलेश ने कहा कि धीरे धीरे पत्रकारिता पूंजीवादी शिकंजे में कस रही है. पत्रकारों को नहीं पता कि अब आज़ादी रही ही नहीं. सारी आज़ादी हड़प ली गई है. उन्होंने कहा कि पत्रकार अज्ञान के आनंद लोक में खुश हैं और अपनी आज़ादी खो रहे हैं।

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