Published On : Wed, Jan 2nd, 2019

मातृ शक्ति को स्वतंत्र करना शिक्षा से संभव – भागवत

Advertisement

नागपुर: संघप्रमुख डॉ मोहन भागवत ने कहाँ है कि मातृ शक्ति को बंधन में रखने की परंपरा कभी इस देश में नहीं रही। यह मानसिकता बीच के दौर में आयी है। महिलाओं को स्वतंत्रता देने की आवश्यकता है और इसके लिए माध्यम शिक्षा है। माँ शिक्षित होती है तो परिवार शिक्षित होता है। भागवत सेवासदन शिक्षण संस्था द्वारा रमाबाई रानडे स्म्रति शिक्षण-प्रबोधन पुरुस्कार वितरण समारोह में बोल रहे थे।

उन्होंने कहाँ की शिक्षा सिर्फ किताबी नहीं होनी चाहिए। इसका मकसद सिर्फ पैसे कमाना या डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए। डिग्री लेकर पैसा कमाना यह शिक्षा नहीं अज्ञानता है। हमारे यहाँ केंद्र सरकार द्वारा तय नीतियों के आधार शिक्षा आधारित है लेकिन इसका विकेन्द्रीकरण होना चाहिए।

शिक्षा के साथ अनुभव जरुरी है। इसे लेकर स्वजागरण होना चाहिए। हम जैसी शिक्षा चाहते है वैसी नीति बननी चाहिए। सुनाई पड़ता है कि देश में नई नीति शिक्षा को लेकर आने वाली है। वह बन भी चुकी है लेकिन कब आयेगी पता नहीं। विद्या का प्रयोजन सेवा है। कई लोग इस पर काम कर रहे है।

Advertisement
Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Follow Nagpur Today on Google
Add Nagpur Today to your Preferred Sources on Google to see our latest news more prominently in Search.