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    Published On : Mon, Feb 6th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    डीसीपी दीपाली ने बताया, ‘मैंने भी बचपन में यौन अत्याचार का सामना किया था…’


    नागपुर:
    समूचा सभागार उस समय सन्न रह गया जब डीसीपी दीपाली मासिरकर ने कहा कि ‘पाँच साल की उम्र में उन्होंने भी यौन अत्याचार सहा है।’ अवसर था भारतीय बालरोग विशेषज्ञ चिकित्सकों (आईएपी) द्वारा आयोजित ‘बाल यौन अपराध रोकथाम’ विषयक कार्यक्रम में बतौर अतिथि उनका संबोधन।

    दीपाली मासिरकर भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी हैं और फिलहाल नागपुर पुलिस की सेवा में बतौर डीसीपी पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि उनके गणित के शिक्षक उनके शरीर पर यहाँ-वहाँ हाथ फेरते थे। शिक्षक का यह आचरण बहुत बुरा लगता था लेकिन यह नहीं मालूम था कि अपनी उन तकलीफों को अपने माता-पिता या बड़े जनों के समक्ष कैसे व्यक्त किया जाए।

    डीसीपी मासिरकर ने कहा कि यौन अपराधों के ज्यादातर मामलों में करीबी लोगों को ही हाथ होता है। यह सच बार-बार उजागर हुआ है। बच्चियों के माता-पिता को इस मामले में सतर्क रहने की जरुरत है, लेकिन कई बार तो पिता द्वारा ही बेटी के शोषण की करतूत उजागर होती है।

    उन्होंने शहर का ही एक वाकया उपस्थितों से साझा करते हुए बताया कि नागपुर में रहने वाले एक 72 वर्षीय वानिवृत वैज्ञानिक ने अपनी तीन दत्तक पुत्रियों के साथ कई बार यौन अत्याचार किया। 15 वर्षीय बेटी ने जब अपने पर हो रहे अत्यचार के बारे में अपनी शिक्षक को बताया तो उसने उस बच्ची से इस अत्याचार के बारे में किसी को न बताने की सलाह दी। यहाँ तक कि महिला रोग विशेषज्ञ एवं उस समाजसेवी संस्था ने भी कि जिससे वह बच्ची इस शोषण से बाहर निकलने के लिए मदद मांग रही थी, उस संस्था ने भी पुलिस को इस अपराध के बारे में कुछ नहीं बताया।

    डीसीपी मासिरकर ने कहा कि बच्चों को यौन अत्याचार पर मुँह बंद रखने की बजाय उन्हें इस तरह के अत्याचारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देकर जागरुक बनाया जाना चाहिए, साथ ही इस तरह के अत्याचारों का विरोध करने और अपने करीबियों को इस बारे में सूचना देने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

    नागपुर में बाल कल्याण समिति तक नहीं
    डीसीपी दीपाली मासिरकर ने इस मौके पर यह खुलासा भी किया कि नागपुर शहर या जिले में तो अदद बाल कल्याण समिति तक नहीं है कि जो इस क्षेत्र में होने वाले बाल यौन अपराधों पर रोकथाम और नियंत्रण के साथ यौन अत्याचार झेलने वाले बच्चों के मानसिक विकास की दिशा में कोई काम कर सके। यदि कभी जरुरी होता है तो भंडारा जिले की बाल कल्याण समिति की मदद ली जाती है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति वोटबैंक का गणित जुटाने वाली मशीनरी में तब्दील हो चुकी है, ऐसे में राजनेताओं से किसी तरह के भी सकारात्मक कार्य में पहल की उम्मीद बेमानी है। डीसीपी मासिरकर ने कहा कि समाज के प्रबुद्ध लोगों को चाहिए कि वे यौन उत्पीड़न झेलने वाले बच्चों के मानसिक, शैक्षिक एवं आर्थिक पुनर्वास के लिए ऐसे बच्चों को गोद लें।


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