Published On : Fri, Dec 28th, 2018

हुआ श्री कृष्ण का जन्म, मनाया नंदोत्सव, बांटी बधाई

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नागपुर: बड़कस चैक, महल स्थित ‘श्यामकुंज’ में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन रामबल्लभ गट्टानी परिवार के यजमानत्व में जारी है। कथा का सरस रसपान पं. अशोक शास्त्री महाराज भक्तों को करा रहे हैं। आज कथा के चतुर्थ दिवस पं. शास्त्रीजी ने गजेंद्र मोक्ष, वामन चरित्र, श्रीराम अवतार, श्री कृष्ण जन्म व नंदोत्सव का वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि श्री हरि विष्णु ने इंद्र का देवलोक में अधिकार पुनः स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया। देवलोक पर असुर राजा बली ने अधिकार कर लिया था। बली विरोचन के पुत्र व प्रल्हाद के पौत्र थे व एक दयालु असुर राजा के रूप में जाने जाते थे। श्री हरि वामन – एक ब्राम्हण बौने के वेश में राजा बली के पास गए और उनसे रहने के लिये तीन पग भूमि दान में मांगी। उनके हाथ में एक छोटा लकड़ी का छाता था। गुरु शुक्राचार्य के चेताने के बावजूद बली ने वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे डाला। वामन ने अपना आकार इतना बड़ा कर लिया कि पहले पग में भूलोक। दूसरे पग में देवलोक नाप लिया। तीसरे पग के लिये भूमि ही नहीं बची। वचन के पक्के राजा बली ने तीसरे पग के लिये अपने सिर को प्रस्तुत कर दिया। राजा की वचनबद्धता से अतिप्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक दे दिया व आशीर्वाद दिया।

उन्होंने आगे कहा कि जब जब धरती पर पाप की अधिकता हो जाती है तब तब प्रभु अपना अवतार ग्रहण करते हैं व दुष्टों व असुरी शक्तियों का संहार करते हैं। श्री राम ने भी मर्यादा पुरुषोत्तम की मिसाल रखते हुए रावण को उसके दुष्कर्माें का फल प्रदान किया। श्री राम ने संसार के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया। आज श्री कृष्ण जन्म पर नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

इस अवसर पर कथा पंडाल को फूलों व गुब्बारों से सजाया गया। जैसे ही बाल कृष्ण का जन्म हुआ चहुंओर से माखन- मिश्री, फूलों की बौछार की गई। महिला मंडल की महिलाओं ने एक से बढ़कर एक बधाई गीत गाकर हर्ष, आनंद प्रस्तुत किया। श्री कृष्ण के जन्म की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। वासुदेव- देवकी का किरदार मोहन गट्टानी, सुचिता गट्टानी, नरसिंह बने राजकुमार गट्टानी, भक्त प्रल्हाद राशि गट्टानी व हिरण्याक्ष धीरज लोया बने।

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आज व्यासपीठ का पूजन यजमान मोहन गट्टानी, राजकुमार गट्टानी, मनोज गट्टानी, अनिल मंत्री, भावेश मजेठिया, जगदीश काबरा, एड. भीमसेन मोहता, श्याम सुंदर राठी, दामोदर टावरी, पंडित गोवर्धन धादिच, सत्यनारायण लोया ने किया। कथा का समय दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक रखा गया है।

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