Published On : Mon, Jul 1st, 2019

धरती पर स्वर्ग है वहां, हरे भरे वृक्ष हैं जहां – डॉ.प्रितम गेडाम

वन महोत्सव सप्ताह विशेष

नागपुर: देश मे हर साल जुलाई माह के पहले सप्ताह को वन महोत्सव सप्ताह के रूप मे मनाया जाता है. वन नीति 1988 के अनुसार भूमि के कुल क्षेत्रफल का 33 प्रतिशत भाग वन-आच्छादित होना चाहिए. तभी प्राकृतिक संतुलन रह सकेगा. किंतु सन 2001 के रिमोट सेंसिंग द्वारा एकत्रित किए गए आकड़ों के अनुसार देश का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि.मी. है. इनमें वन भाग 6,75,538 वर्ग कि.मी. है. यह वन आवरण मात्र 20 प्रतिशत ही होता है.

डॉ. प्रितम गेडाम ने जानकारी देते हुए बताया कि वनों का क्षरण अनेक प्रकार से होता है. इनमें वृक्षों को काटना, सुखाना, जलाना, अवैध उत्खनन प्रमुख है.गांवों, नगरों, महानगरों का क्षेत्रफल बढ़ रहा है और जंगल सिकुड़ रहा है. दैनिक आवश्यकताओं के लिए लकड़ी के प्रयोग की मांग बढ़ी है. बदलते जलवायु के कारण मनुष्य का स्वभाव भी चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो गया है. पेड़ों की कमी के कारण लगातार रेगिस्तान का विस्तार हो रहा है.

भारतीय वन स्थिति सर्वेक्षण रिपोर्ट 2017 अनुसार वन क्षेत्र के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में है. भारत के भू- भाग का 24.4 प्रतिशत हिस्सा वनों और पेड़ों से घिरा है. हालांकि यह विश्व के कुल भू- भाग का केवल 2.4 प्रतिशत हिस्सा ही है ऐसा तब है जबकि बाकी 9 देशों में जनसंख्या घनत्व 150 व्यक्ति/वर्ग किलोमीटर है और भारत में यह 382 व्यक्ति/वर्ग किलोमीटर है और इन पर 17 प्रतिशत मनुष्यों की आबादी और मवेशियों की 18 प्रतिशत संख्या की जरूरतों को पूरा करने का दवाब है. वर्ष 1987 से भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट को द्विवार्षिक रूप से भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा प्रकाशित किया जाता है. यह इस श्रेणी की 15वीं रिपोर्ट है.

नेचर जर्नल की रिपोर्ट अनुसार तो आपको अन्दाजा लग जाएगा कि हम जिस टिकाऊ विकास की बात करते हैं वो सब निरर्थक और निष्फल है. रिपोर्ट का दावा है कि हम हर साल लगभग 15.3 अरब पेड़ खो रहे हैं. प्रतिवर्ष एक व्यक्ति पर तकरीबन दो पौधे का नुकसान हो रहा है. इन सबके मुकाबले विश्वभर में मात्र 5 अरब पेड़ लगाए जाते हैं. सीधे तौर पर हमें 10 अरब पेड़ों का नुकसान हर साल उठाना पड़ता है. रिपोर्ट में भारत के हिस्से के आँकड़ों पर नजर डालें तो और भी हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आते हैं. विश्व में प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या 422 है जबकि भारत के एक व्यक्ति के हिस्से मात्र 8 पेड़ नसीब होते हैं. 35 अरब पेड़ों वाला भारत कुल पौधों की संख्या के मामले में बहुत नीचे है. सबसे ज्यादा 641 अरब पेड़ों के साथ रशिया है. कनाडा में 318 अरब तो ब्राजील में 301 अरब पेड़ हैं. वहीं अमेरिका 228 अरब पेड़ों के साथ चैथे पायदान पर है। भारत में स्थिति भयावह है. मेडिकल जर्नल द लांसेट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार 2015 में प्रदूषण से होने वाली दुनिया भर की 90 लाख मौतों में भारत में अकेले 28 प्रतिशत लोगों को जान गंवानी पड़ी. प्रदूषण से हो रही मौतों के मामले में 188 देशों की सूची में भारत पाँचवें पायदान पर आता है.

अगर पेड़ नहीं होंते तो पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता. पेड़ की हमारी प्रकृति है जो की पूरी पृथ्वी को हरा भरा और खुशहाल बना कर रखते है.

पेड़ जीवन भर हमें कुछ ना कुछ देते ही रहते है, फिर भी हम अपने निजी स्वार्थ के लिए पेड़ों को काट देते हैं. आज यह बहुत ही विडंबना का विषय है कि जो पेड़ हमें जीवन दे रहे हैं हम उन्हीं को नष्ट करने पर तुले हुए हैं. अगर हमें पृथ्वी को बचाए रखना है तो अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाने होंगे. पेड शुद्ध आॅक्सीजन देकर प्रदूषण नियंत्रण का कार्य करते हैं. पेड बारिश के दिनों में भूमि के कटाव को रोकते हैं और बाढ़ आने से रोकते हैं. पेड़ों के पत्तों से भूमि उपजाऊ हो जाती है, पेड़ अन्य जीव जंतु को रहने के लिए घर के समान स्थान देते है और अन्य बहुमूल्य खनिज संपदा भी इन्हीं की देन है. पेडो से जंगल समृद्ध होते है जीससे वन्यप्राणी जीवन समृद्ध होता है. पेड़ों से जल के स्त्रोत समृद्ध होते हैं. पेड़ों के कारण पृथ्वी की ओजोन परत सुरक्षित रहती है इसके कारण सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से हमारी सुरक्षा होती है. वृक्षों के कारण पृथ्वी की सतह ठंडी रहती है पेड़ हमारी पहली साँस से लेकर अंतिम संस्कार तक मदद करते हैं.

लेकिन धीरे-धीरे जब से औद्योगिकीकरण और शहरीकरण बढ़ा है वैसे वैसे मानव द्वारा पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई है जिसके कारण पड़ते का प्राकृतिक संतुलन गड़बड़ा गया है. शहरों में पेड़ नहीं होने के कारण वहां पर वर्षा कम होती है और वायु प्रदूषण भी अधिक मात्रा में रहता है जिससे तापमान मे लगातार बढोतरी हो रही है अगर पेड़ों की कटाई निरंतर इसी गति से चलती रही तो वह दिन दूर नहीं है जब पृथ्वी का विनाश हो जाएगा. तो आईये हम सभी लोग पर्यावरण के प्रती अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए वृक्षारोपण के कार्य मे पुरा सहयोग करे, पेड लगाए- जीवन बचाए.