Published On : Sun, Jul 19th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

‘ज्यूडिशियल टेररिज्म’ टिप्पणी पर हाईकोर्ट सख्त, वकील के खिलाफ बार काउंसिल कार्रवाई के संकेत

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नागपुर: एक स्थानीय अंग्रेज़ी दैनिक में प्रकाशित खबर के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अदालत की कार्यवाही को “ज्यूडिशियल टेररिज्म” बताए जाने वाली टिप्पणी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिवक्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं।

न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ ने अमरावती के एक अधिवक्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके आचरण को पेशेवर कदाचार मानते हुए बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा को क्यों न भेजा जाए। अधिवक्ता को 28 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला एक सेवानिवृत्त निजी स्कूल कर्मचारी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता ने बकाया वेतन, भविष्य निधि (पीएफ) और ग्रेच्युटी के भुगतान की मांग के साथ-साथ बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने का भी अनुरोध किया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत हाईकोर्ट स्कूल की मान्यता रद्द करने का आदेश दे सकता है। संतोषजनक कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किए जाने पर अदालत ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर ₹50,000 की लागत जमा करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं होने पर याचिका स्वतः खारिज मानी जाएगी।

इसी दौरान अधिवक्ता ने कथित तौर पर अदालत की कार्यवाही को “ज्यूडिशियल टेररिज्म” करार दिया। इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि यह बयान पूरी तरह अनुचित है और एक अधिवक्ता के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। अदालत ने इसे न्यायपालिका की गरिमा और सम्मान पर सीधा प्रहार बताया।

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हालांकि अदालत ने तत्काल अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं की, लेकिन मामले को बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा के पास पेशेवर कदाचार की जांच के लिए भेजने पर विचार किया है। यदि मामला संदर्भित किया जाता है तो बार काउंसिल से 12 सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा जा सकता है।

वहीं, अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर ₹50,000 की लागत जमा कर दी जाती है, तो याचिका पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।

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