
विदर्भ के 13 लाख व्यापारियों की अग्रणी व शीर्ष संस्था नाग विदर्भ चेंबर ऑफ काॅमर्स द्वारा दि. 19 जून 2026 को होटल द्वारकामाई में आयोजित कार्यकारिणी सभा में चेंबर की खाद्य सुरक्षा एवं औषध एक्ट उपसमिती के संयोजक एडवोकेट निखिल अग्रवाल ने FSSAI (Food) Act, Rules & Licensing Regulations पर सदस्यों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन किया गया।
एडवोकेट निखिल अग्रवाल ने सदस्यों का मार्गदर्शन करते हुये कहा कि खा़द्य व्यवसाय सीधा मनुष्य के स्वास्थ्य से जुड़ा है इसीलिए इससे संबंधित कानून व प्रावधान सख्त एवं जटिल है। यदि व्यवसायी खाद्य सुरक्षा व हायजिन का विशेष ध्यान रखकर सभी नियमों एवं प्रावधानों का समय पालन करते हुये व्यापार करते है तो उन्हें व्यापारिक परेशानियों का सामना नहीं करना पडे़गा।
आगे उन्होंने कहा कि किसी प्रकार का भी खाद्य व्यवसाय करने के लिए लायसंस लेना अनिवार्य है। लायसंस में व्यापार की फुड केटेगरी लिखना अनिवार्य है। नियामानुसार खाद्य व्यापारी जिन व्यापारियो से सामान खरीद या बेच रहे है उनके पास भी लायसंस रहना अनिवार्य है तथा वह एक्टिव भी होना चाहिए। यदि बिना लायसंस वाले व्यापारियों के साथ व्यापार करते है तो रू.10 लाख के जुर्माने का प्रावधान है। यदि उनका प्रोडक्ट खा़द्य सुरक्षा के मानकों के अनुसार नही है तो रू. 5 लाख और खाद्य सुरक्षित भी नही तो जुर्माने के साथ-साथ 3-5 साल की सजा का भी प्रावधान है।
खाद्य व्यापारियों द्वारा अपने लेबलिंग में प्रोडक्ट में उपयोग किए गए सभी पदार्थो की सही जानकारी देना आवश्यक है साथ ही यदि वे अपने प्रोडक्ट की advertising कर रहे है तो भी प्रोडक्ट जानकारी देना आवश्यक है। खाद्य पदार्थ की गलत जानकारी देने पर सरकार द्वारा रू 10 लाख तक की पेनल्टी का प्रावधान है। व्यापारियों द्वार स्वंय साल में 2 बार अपने उत्पादों की जांच करके, उसकी रिपोर्ट भी एफडीए की बेवसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य है। प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई व फुड हायजिन का विशेष ध्यान रखना चाहिए और यदि उनके प्रतिष्ठानों पर खाद्य अधिकारी द्वारा इंस्पेक्शन किया जाता है तो अधिकारी का अपने खाद्य पदार्थ की सही व पूरी जानकारी उपलब्ध कराना चाहिए। सभी फुड मैन्युफैक्चर्स को 31 मई तक फार्म डी भरना अनिवार्य। समय पर फार्म डी नहीं भरने पर एफडीए द्वारा प्रतिदिन जुर्माने का भी प्रावधान है।
तेल व्यवसाय को लेकर नया नियम है कि हर बार नए टिन में तेल बेचा जाना है पुराने टिन का उपयोग नहीं जा सकता और तेल हर बार लेब से सर्टिफाईड होना भी अनिवार्य है।
उन्होंने खाद्य व्यवसायियों से विशेष आग्रह किया कि यदि उनके प्रतिष्ठान पर खाद्य सुरक्षा एवं मानको लेकर एफडीए द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही होती है तो व्यापारी एफडीए के नोटिस का सही जवाब दे, इंस्पेक्शन संबंधी अपने कम्पलायंस पूरे करे। बिना किसी कार्यवाही के पेनल्टी का भुगतान न करें क्योकिं ऐसा नियम है कि यदि व्यापारी द्वारा 2 बार जुर्माने का भुगतान कर दिया जाता है तो उनका लायसंस अपने-आप रद्द हो जाता है और नया लायसंस भी सरलता से नहीं मिलता है।
चेंबर के अध्यक्ष श्री फारूक अकबानी ने सदस्यों से कहा कि सभा में खाद्य व्यवसाय संबंधित दी गयी जानकारी का लाभ लेते हुये नियमों के साथ व्यापार करे ताकि खाद्य व्यापारियों को एफडीए की कार्यवाहियों का सामना न करना पड़े।
चेंबर के सचिव सीए हेमंत सारडा़ ने सदस्यों को खाद्य व्यवसाय संबंधीत महत्वपूर्ण जानकारी देने हेतु धन्यवाद दिया एवं सभा का आभार प्रदर्शन किया।
इस अवसर प्रमुखता से सर्वश्री – अध्यक्ष – फारूक अकबानी, पुर्व अध्यक्ष – हेमंत जी खुंगर, मयुरजी पंचमतिया, अश्विन प्रकाश जी मेहाड़िया (अग्रवाल), IPP- अर्जुनदास जी आहुजा, उपाध्यक्ष – स्वप्निल अहिरकर, उमेश पटेल, सचिव – सीए हेमंत सारडा, कोषाध्यक्ष – सचिन पुनियानी, सहसचिव – दिपक अग्रवाल व बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे।
उपरोक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सचिव सीए हेमंत सारडा ने उपलब्ध करायी।
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