Published On : Thu, May 18th, 2017

जीएसटी: टैक्स दरें तय, दूध-अनाज पर टैक्स नहीं, कई चीजें होंगी सस्ती

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने यहां आज शुरू अपनी दो दिन की बैठक के पहले दिन 80 से 90 प्रतिशत वस्तुओं और सेवाओं पर कर की दरों का निर्धारण कर लिया है. प्रस्तावित जीएसटी व्यवस्था में चार स्तर की दरें रखी गई हैं जिनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल की आवश्यक वस्तुओं पर पांच प्रतिशत की न्यूनतम रखी गई है. दूध, कई अनाजों को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है. जीएसटी लागू होने के बाद से कई चीजें सस्ती होंगी.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि कुल 1,211 वस्तुओं में से छह को छोड़कर अन्य के लिए जीएसटी दरें तय की गई हैं. जीएसटी परिषद कल सेवाओं की दरों पर विचार करेगी. अगर तब तक सभी वस्तुओं के लिए कर दरें तय नहीं होती हैं तो परिषद की एक और बैठक हो सकती है. जीएसटी दायरे से बाहर रहने वाली वस्तुओं की सूची को कल अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है.सोने और बीड़ी पर भी कर की दरों पर विचार होगा.

कई चीजें होंगी सस्ती

वहीं, राजस्व सचिव हंसमुख अधिया ने बताया कि दूध पर जीएसटी नहीं लगेगा. खाद्यान्न सस्ते होंगे. बालों के तेल, साबुन, टूथपेस्ट पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा. अनाज पर कर नहीं लगेगा जबकि इस पर अभी 5 प्रतिशत दर से कर लगता है. कोयले पर जीएसटी दर 5 प्रतिशत तय, अभी इस पर 11.69 प्रतिशत कर लगता है. चीनी, चाय, कॉफी, खाद्य तेल पर भी 5 प्रतिशत की दर से कर लगेगा.

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नियमों को भी मंजूरी

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली परिषद ने बैठक के पहले सत्र में वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत नियमों को भी मंजूरी दी. जीएसटी एक जुलाई से लागू किए जाने की योजना है. परिषद में सभी राज्यों के वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं. 80 से 90 प्रतिशत वस्तुओं, सेवाओं के बारे में यह तह हो गया है कि उन्हें 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के कर ढांचे में कहां रखा जाएगा.

फिटमेंट इस तरीके से किया गया है कि लोगों पर नयी कर व्यवस्था के कारण कर का बोझ नहीं बढ़े. इसलिए वस्तुओं और सेवाओं को उनके उपर इस समय लागू उत्पाद शुल्क, वैट या सेवा कर को ध्यान में रखकर जीएसटी की विभिन्न दरों के साथ जोड़ा जा रहा है. समझा जाता है कि कल बैठक संपन्न होने के बाद तय कर दरों का पूरा ब्योरा उपलब्ध हो पाएगा.

विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों ने रेशमी धागे, पूजा की सामग्री और हस्तशिल्प उत्पादों को जीएसटी दरों में छूट की मांग की है. हालांकि, जेटली का मानना है कि जीएसटी के तहत न्यूनतम छूट दी जानी चाहिए और यह आवश्यक होने पर ही दी जानी चाहिए.

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