Published On : Wed, Jan 9th, 2019

आयटक की हड़ताल में पहुंचे सैकड़ों कामगार

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नागपुर: विविध मांगों को लेकर पूर्व निर्धारित आयटक की 2 दिवसीय हड़ताल में पहले दिन विविध कामगार व कर्मचारी संगठनों की ओर से संविधान चौक पर सैकड़ों की संख्या में कामगार पहुंचे. सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. बढ़ती महंगाई को रोकने, बेरोजगारों को स्थायी रोजगार देने, कामगार विरोधी कानूनी लाना बंद करने, ठेकेदारी पद्धति बंद करने, 18000 रुपये निम्नतम वेतन लागू करने, असंगठित कामगारों को सामाजिक सुरक्षा व पेंशन लागू करने, कामगार संगठनों का पंजीयन 45 दिनों के भीतर करने, अस्थायी कामगारों को नियमित कामगारों की तरह समान वेतन, बोनस व ईपीएफ की सिलिंग समाप्त करने, फिक्स टर्म एम्प्लायमेंट तुरंत बंद करने, योजना कामगार, आंगनवाड़ी, आशा आदि कामगारों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, रेलवे, डिफेन्स व वित्तीय संस्थाओं का निजीकरण बंद करने, विदेशी निवेश बंद करने जैसी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर देशव्यापी हड़ताल की गई. इसमें आयटक, इंटक, सीटू, टीयूसीसी, एआईटीयूसीसी, एआईटीयूओ व केन्द्रीय व राज्य सकारी कर्मचारी फेडरेशन के हजारों कामगार शामिल हुए.

मोदी सरकार चले जाओ
संविधान चौक पर दोपहर 12 बजे विविध संगठनों के कामगार मोर्चा के रूप में एक हुए. करीब 2000 से अधिक कामगारों की भीड़ यहां जुट गई, जिसमें एलआईसी, बैंक, केन्द्रीय कार्यालय, कोल खदान, विद्युत क्षेत्र, दूरसंचार, पोस्ट, आंगनवाड़ी, आशा, शालेय पोषण आहार, सभी उद्योगों के ठेका पद्धति कामगार जमा हुए. आयटक के स्टेट महासचिव शाम काले, सीटू के भरणे, जयवंत गुवे, मोहनदास नायडू, एस.क्यू जमा, मारोती वानखेड़े. माधव भहोंडे, मोहन शर्मा के नेतृत्व में ये कामगार यहां जमा हुए. संविधान चौक पर आयोजित सभा में कामगार नेताओं ने ‘मोदी सरकार चले जाओ’ के नारे लगे. बताया गया कि देशभर में 25 करोड़ संगठित व असंगठित कामगारों ने हड़ताल में हिस्सा लिया. सभा को चंदा मेंढे, उषा चारभे, नंदा डोंगरे, हरिश्चंद्र पवार, सुरेश बोभाटे, प्रदीप धरमठोक, दिलीप देशपांडे, शाम काले ने संबोधित किया. संचालन सी.एम. मौर्य ने किया. 9 जनवरी को सुबह 11 बजे सभी कामगारों को संविधान चौक पर एकत्र होने की अपील की गई है.

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केंद्रीय GST
केंद्रीय जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया. बैनर-पोस्टर के साथ पूरे दिन वे परिसर के बाहर गेट पर डटे रहे. महासचिव अजीतकुमार केजी, चंदन यादव अध्यक्ष इंस्पेक्टर एसोसिएशन ने बताया कि 35 साल की शासकीय सेवा में मात्र एक पदोन्नति बतौर इंस्पेक्टर भर्ती में होती है. अधीक्षक के पद पर अधिकतर अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद खाली पड़े हुए हैं, जबकि आईआरएस अधिकारी कार्यकाल के दौरान 8-9 प्रोमोशन पाते हैं. इन विसंगतियों को दूर करने की जरूरत है. अधीक्षकों के वेतन में भीषण विसंगतियां हैं.

उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावज़ूद सीबीआईसी इन मध्यम स्तर के अधिकारियों के प्रति उदासीन बना हुआ है. लगातार अवाज उठाने के बाद भी पहल नहीं की जाती है. कस्टम्स के समान स्तर पर भर्ती अधिकारियों को शीघ्र पदोन्नत कर अपने से कई वर्ष वरिष्ठ एक्साइज़ शाखा के अधीक्षकों के उच्च अधिकारियों के रूप में पदस्थापित करने पर सीजीएसटी अधीक्षकों में भयंकर आक्रोश कायम है. पेंशन पर सरकार की ओर से अनिश्चितता दूर करने की कोई पहल नहीं की जा रही है, जिसका हर स्तर पर विरोध किया जा रहा है.

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निरीक्षकों की अखिल भारतीय मेरिट से भर्ती के बावज़ूद उनको अखिल भारतीय सीनियोरिटी का लाभ नहीं देना एवं उनकी अन्य राज्यों या क्षेत्रों में तबादलों पर रोक के विरोध में उनके हड़ताल का पुरज़ोर समर्थन कर रहे हैं.

आयकर विभाग
आयकर विभाग के अधिकारियों ने भी स्ट्राइक के दौरान अपने नारे बुलंद किए. कंफेडरेशन आफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के बैनर तले आंदोलन चलाया गया. इसकी मुख्य मांग़ नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) को खत्म करना, पुरानी योजना को पुन: लागू करना है. संगठन के जितेंद्र भारती, अभय आष्टनकर, गौतम कुमार, विनोद कांबले, विकास खोब्रागडे, विजय निखारे, रवि चौधरी, बी.एन. चिकाटे, प्रतीक कुमार, संजय रोडगे ने बताया कि वर्तमान सरकार कर्मचारियों और अधिकारियों की एक भी नहीं सुन रही है और अपने निर्णय को थोप रही है, जिससे कार्य करना मुश्किल होता जा रहा है. वर्तमान सरकार केवल आश्वासन और घोषणा कर अपना पल्ला झाड़ लेती है. इनकी मुख्य मांग है खाली पदों पर तत्काल नियुक्ति हो, प्रमोशन के नियमों का पालन हो और तत्काल इसका लाभ दिया जाए. कांट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित किया जाए. एक ही जैसे कार्य के वेतन की विसंगति को दूर किया जाए.

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