Published On : Wed, May 19th, 2021

हरियाली पृथ्वी का आवरण हैं- आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी

नागपुर : हरियाली पृथ्वी का आवरण हैं यह उदबोधन धर्मतीर्थ क्षेत्र प्रणेता दिगंबर जैनाचार्य गुप्तिनंदीजी गुरुदेव ने विश्व शांति अमृत ऋषभोत्सव के अंतर्गत श्री. धर्मराजश्री तपोभूमि दिगंबर जैन ट्रस्ट और धर्मतीर्थ विकास समिति द्वारा आयोजित ऑनलाइन धर्मसभा में दिया.

गुरुदेव ने धर्मसभा में कहा जंगल में रहनेवाले मुनि के पास उस समय प्रतिमा नहीं थी, जंगल में ऐसी भक्ति की वहां भगवान प्रगट हो गए. श्रद्धा से नमस्कार करेंगे तो चमत्कार होगा. भूकंप, महामारी निवारण का सबसे बड़ा उपाय वृक्षारोपण हैं. जितना वृक्षारोपण करेंगे, हरियाली करेंगे तो फूल ऑक्सीजन मिलेगा. हरियाली पृथ्वी का आवरण हैं. पेड़, पौधों से इसका संरक्षण होता हैं, हमारी लालसा इनका भक्षण करती हैं. मानवता को बचाता, मनुष्य जीवन को बचाना हैं. पर्यावरण का रक्षण जरूरी हैं. हरियाली से खुशियाली को बचाने की कसम लेनी होगी. पेड़ लगाना तो नहीं उसकी देखभाल करनी होगी. जल संरक्षण बढ़ाना होगा. संत का मिलन देखने से पुण्य संचय होता हैं.

धर्म प्रचार करनेवाले गणधर का प्रतीक होते हैं- आचार्यश्री कुशाग्रनंदीजी
महातपस्वी आचार्यश्री डॉ. कुशाग्रनंदीजी गुरुदेव ने कहा हम भगवान महावीर के शासन काल में जी रहे हैं, उनका शासन अनमोल हैं. भगवान महावीर की देशना को सुनाने का सभी प्रयास कर रहे हैं. उनकी तपस्या, साधना, अहिंसा के पुजारी कहा जाता हैं. भगवान महावीर ने भरत क्षेत्र में कुंडलपुर में जन्म लिया. जनमानस को पारिवारिक शांति, मानसिक शांति, सारे उपद्रव को प्रातिहार्य करने आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव निकले हैं. उपद्रव सौ साल में एक बार होता हैं. इस काल धर्म के बिकट निकट हैं, गुरु से निकट हैं, देव शास्त्र के निकट हैं जो जीव लगे हुए हैं वहीं बचे हुए हैं. आज इस समय भयभीत वातावरण हैं. परमात्मा की भक्ति करते रहे. हमारे साधु संत परोपकार के लिए, जगत कल्याण के लिए आराधना कर रहे हैं. अपनी साधना करते हुए साधु उपकार कर रहे हैं. मंदिर जाने के लिए आदमी डर रहा हैं. प्रभु नाम ऐसा नाम हैं भव नदी को पार करता हैं.


आज लोगों ने अपने घर को मंदिर बनाया हैं. साधु संतों ने वह श्रावक कर रहा हैं. जो देव शास्त्र गुरु के शरण में आता हैं उसको यम भी नहीं ले जाता हैं परंतु जिसका जन्म निश्चित हैं, उसका मरण भी निश्चित हैं. इस स्थिती से घबराये नहीं, समय आया हैं निकल जायेगा. समय बिकट हैं और आप अपने आपको बचाने का प्रयास करे, प्रभु शरण में आये. चौसष्ठ ऋद्धि को धारण करनेवाले मुनिराज होते हैं. ऋद्धि संपन्न मुनिराजों के प्रभाव से ताकत हैं, शक्ति हैं

महापुरुषों का दर्शन मिल जाये, आशीर्वाद मिल जाये तो व्याधि से दूर हो सकते हैं. प्रभु स्मरण, महाशांतिधारा करे. जहां साधु संत आते थे लेकिन आप पहुच नहीं पाते थे, आज वर्चुअली माध्यम से साधु संत घर घर पहुंच रहे गए हैं. आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव रोज रोज एक एक मुनिराजों का दर्शन, उनका उदबोधन आप लोगों करा रहे हैं, वीतराग भावना का कार्य हैं. धर्म का प्रचार करनेवाले गणधर का प्रतीक हैं.

हमारे साधु संत समाज के लिए समय दे रहे हैं देव-शास्त्र-गुरु की आराधना करते रहे. मुनिसुव्रतनाथ भगवान का विधान करे. भक्ति करने का अवसर मिला हैं, भक्ति करे. धर्मसभा का संचालन स्वरकोकिला गणिनी आर्यिका आस्थाश्री माताजी ने किया. गुरुवार 20 मई को सुबह 7:20 बजे शांतिधारा होगी, सुबह 9 बजे आर्यिका विज्ञाश्री माताजी का उदबोधन, शाम 7:30 बजे से परमानंद यात्रा, चालीसा, भक्तामर पाठ, महाशांतिधारा का उच्चारण एवं रहस्योद्घाटन, 48 ऋद्धि-विद्या सिद्धि मंत्रानुष्ठान, महामृत्युंजय जाप, आरती होगी यह जानकारी धर्मतीर्थ विकास समिति के प्रवक्ता नितिन नखाते ने दी हैं.