
नागपुर: महाराष्ट्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान घर-घर समाचार पत्र पहुंचाने पर रोक लगाने के अपने फैसले को जायज ठहराया है। सरकार ने बृहस्पतिवार को यहां बंबई उच्च न्यायालय की पीठ को बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना वायरस किसी सतह पर लंबे समय तक रहता है और समाचार पत्र एक व्यक्ति के हाथ से दूसरे व्यक्ति के हाथ में जाते हैं, जिससे इस जानलेवा वायरस के संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दलीलें रखते हुए कहा कि उसका फैसला एक अपवाद है और इससे प्रेस की स्वतंत्रता का किसी भी तरह उल्लंघन नहीं होता है।
न्यायमूर्ति एन डब्ल्यू साम्ब्रे के समक्ष दाखिल हलफनामे में सरकार ने कहा कि समाचार पत्र जरूरी वस्तु नहीं है, लिहाजा इसे घर-घर पहुंचाने पर रोक के फैसले को किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता।
राज्य सरकार की ओर से नागपुर के कलेक्टर रविन्द्र ठाकरे द्वारा दायर हलफनामे में महाराष्ट्र श्रमजीवी पत्रकार संघ और नागपुर श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा दायर याचिका का जवाब दिया गया है। पत्रकार संघों की याचिका में सरकार के 18 अप्रैल के फैसले को चुनौती दी गई है।
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