Published On : Wed, Jul 18th, 2018

आज से शुरू हो रहा मानसून सत्र में सरकार की 22 दिन में 18 विधेयक पारित कराने की कोशिश

Advertisement

parliament

नई दिल्ली: बुधवार से शुरू हो रहा संसद का मानसून सत्र राजनीतिक सरगर्मियों के अतिरिक्त कामकाज के लिहाज से भी अहम रहने वाला है। 22 दिन चलने वाले इस सत्र में सरकार का इरादा 18 विधेयक पेश करने का है। इन विधेयकों में गैर-कानूनी डिपॉजिट स्कीमों पर लगाम लगाने से लेकर एमएसएमई क्षेत्र के लिए टर्नओवर के लिहाज से परिभाषा में बदलाव करने वाले विधेयक शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त सरकार उन विधेयकों को भी मानसून सत्र में लाने का रास्ता निकालने की तैयारी में है जिन्हें लोकसभा में तो पेश किया जा चुका है, लेकिन अभी तक विभिन्न विभागों से संबंधित संसद की स्थायी समितियों के पास विचारार्थ नहीं भेजा जा सका है।

Gold Rate
Aug 27 ,2026 - Time 10.30Hrs
Gold 24 KT ₹ 1 60,000 /-
Gold 22 KT ₹ 1,48,500 /-
Silver/Kg ₹ 2,41,500/-
Platinum ₹ 88,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

सरकार की कोशिश है कि इन विधेयकों पर भी इसी सत्र में चर्चा कराकर इन्हें पारित करा लिया जाए। इनमें उपभोक्ता संरक्षण कानून, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ओफेंडर्स बिल शामिल हैं। इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ओफेंडर्स कानून को सरकार अध्यादेश के जरिए लागू कर चुकी है। अब इन्हें इस सत्र में पारित कराना सरकार की प्राथमिकता पर रहेगा।

इनके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम पर भी सबकी निगाहें रहेंगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून फैसले लेने की प्रक्रिया को धीमा करता है। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली पूर्व में कई बार विपक्ष से इस कानून में संशोधन के लिए समर्थन मांग चुके हैं ताकि अधिकारियों और बैंकों को धीमी रफ्तार से निर्णय लेने के आरोपों से बचाया जा सके।

Advertisement

देश में गैर-कानूनी डिपॉजिट स्कीम पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सरकार ने विधेयक लाने की तैयारी की है। इस विधेयक में तीन मुख्य पहलू हैं। पहला, इस तरह की स्कीमों के प्रमोशन व संचालन पर सख्त सजा का प्रावधान, डिपॉजिटर्स को भुगतान में डिफाल्ट करने पर सजा और तीसरे राज्य सरकारों की तरफ से एक सक्षम संस्था के गठन का प्रस्ताव विधेयक में किया गया है। इस विधेयक के जरिए तीन विभिन्न प्रकार के अपराधों को परिभाषित किया जाएगा। इनमें अनियंत्रित डिपॉजिट स्कीम का संचालन, नियंत्रित डिपॉजिट स्कीम में भुगतान संबंधी डिफॉल्ट और अनियंत्रित डिपॉजिट स्कीम में गलत जानकारियां देना शामिल हैं।

एमएसएमई डवलपमेंट (संशोधन) बिल के तहत सरकार सालाना टर्नओवर के आधार पर विभिन्न इकाइयों की परिभाषा बदलने का प्रस्ताव कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल कारोबार करना आसान होगा बल्कि इस क्षेत्र की इकाइयों को नए अप्रत्यक्ष कर कानून जीएसटी के साथ तालमेल बिठाने में भी आसानी होगी। फिलहाल पांच करोड़ रुपये की सालाना टर्नओवर वाली इकाई माइक्रो श्रेणी में आती है। जबकि पांच करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 75 करोड़ रुपये सालाना के टर्नओवर वाली इकाई को लघु उद्योग श्रेणी में रखा जाता है। मध्यम श्रेणी की इकाइयों के लिए टर्नओवर की सीमा 75 करोड़ रुपये से लेकर 250 करोड़ रुपये तक है। इस विधेयक के जरिए सरकार इस परिभाषा में संशोधन करना चाहती है।

होम्योपैथिक सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) विधेयक 2018

-इन्सॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) विधेयक 2018
-क्रिमिनल लॉ (संशोधन) विधेयक 2018

-सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (संशोधन) विधेयक 2018

-आइजीएसटी (संशोधन) विधेयक 2018

-जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) संशोधन विधेयक 2018

-प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स (संशोधन) विधेयक 2018

-राइट टू इन्फॉरमेशन (संशोधन) विधेयक 2018

-बांध सुरक्षा विधेयक 2018।

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges

Follow Nagpur Today on Google
Add Nagpur Today to your Preferred Sources on Google to see our latest news more prominently in Search.