Published On : Wed, Jun 19th, 2024
By Nagpur Today Nagpur News

सरकार को प्रशिक्षण और कौशल विकास क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी साझेदारी की घोषणा करनी चाहिए ताकि कुशल और रोजगार योग्य जनशक्ति का एक समूह बनाया जा सके: डॉ. दीपेन अग्रवाल, अध्यक्ष, CAMIT

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चेंबर ऑफ एसोसिएशन्स ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कैमिट) के अध्यक्ष डॉ. दीपेन अग्रवाल ने कौशल विकास और उद्यमिता के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री एवम शिक्षा के राज्य मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात की।

राज्य मंत्री ने कैमिट द्वारा कौशल विकास के संबंध में प्रस्तुत की गई समस्याओं और सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना। डॉ. दीपेन अग्रवाल ने उन्हें बताया कि उद्योग में प्रशिक्षित/कुशल कर्मियों की कमी है, जिसे कौशल विकास केंद्रों की स्थापना, औद्योगिक साझेदारी, युवाओं को उचित व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करके दूर किया जा सकता है। 15-29 आयु वर्ग के 90% युवा तांत्रिक नौकरियों में लगे हुए हैं लेकिन वे पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं। वर्तमान समय की मांग है की स्टार्टअप और उद्यमियों का समर्थन करना, स्थायी वित्तपोषण, प्लेसमेंट में मानकीकरण किया जाए, क्योंकि विभिन्न योजनाओं को विभिन्न राज्य और केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा लागू किया जाता है, प्लेसमेंट सत्यापन का तरीका भिन्न होता है।

इस पहलू को मानकीकृत किया जा सकता है और सभी कौशल विकास योजनाओं में समान रूप से लागू किया जा सकता है, चाहे जिस मंत्रालय द्वारा योजना को वित्त पोषित किया जा रहा हो, मौजूदा आईटीआई की अंतर्ग्रहण क्षमता बढ़ाना और साथ ही टियर II और टियर III शहरों में नए आवासीय संस्थान खोलना। डॉ. अग्रवाल ने सुझाव दिया कि निजी खिलाड़ी बहुत मददगार हो सकते हैं, जैसे स्थानीय उद्योगों के साथ सहयोग करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रशिक्षण कार्यक्रम बाजार की मांगों के अनुरूप हों, इस प्रकार रोजगार क्षमता और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में वृद्धि हो और नए संस्थानों का निर्माण हो। क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम स्थानीय उद्योग की अध्यक्षता के अनुसार तैयार किए जाने चाहिए जैसे कि विदर्भ क्षेत्र के लिए विद्युत उत्पादन, सीमेंट, इस्पात, कपास प्रसंस्करण और सॉल्वेंट निष्कर्षण के लिए होना चाहिए, इसी तरह मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए यह चीनी उद्योग के लिए हो सकता है और इसी तरह। उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों और लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए व्यापक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करना।

डॉ. दीपेन ने आगे कहा कि कौशल विकास किसी व्यक्ति में किसी विशेष कौशल के विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इन उद्योगों द्वारा रोजगार योग्य कुशल और प्रशिक्षित कार्यबल का समूह बनाकर स्थानीय उद्योग की आवश्यकता को भी संबोधित करना है, क्योंकि हमारे पास पहले से ही देश में सबसे अधिक प्रवासी जनसंख्या है।

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राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद, राष्ट्रीय कौशल विकास समन्वय बोर्ड के उपयोग से सुझावों पर विचार किया जाएगा, जो विभागीय अध्ययन के बाद कौशल विकास पर राष्ट्रीय नीति में महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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